एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ‘‘शीत युद्ध’’ के दौर जैसा तनाव उत्पन्न नहीं होना चाहिये : शी चिनफिंग

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वेलिंगटन। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने बृहस्पतिवार को आगाह किया कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शीत युद्ध के दौर जैसी तनाव की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिये।

चीन के राष्ट्रपति ने एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग मंच (एपेक) के वार्षिक सम्मेलन से इतर यह बात कही। उनका यह बयान क्षेत्र में अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया का एक नया सुरक्षा गठबंधन बनने के कई हफ्तों के बाद आया है। इस गठबंधन में ऑस्ट्रेलिया परमाणु पनडुब्बियों का निर्माण करेगा। चीन ने इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी आलोचना की थी।

चिनफिंग ने न्यूजीलैंड की मेजबानी में डिजिटल माध्यम से आयोजित सम्मेलन में, पहले से रिकॉर्ड किए गए अपने वीडियो में कहा कि इस क्षेत्र में वैचारिक या भू-राजनीतिक आधार पर सीमाएं खींचने का प्रयास विफल हो जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘एशिया-प्रशांत में शीत युद्ध के दौर जैसी तनाव की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिये।’’ चिनफिंग ने कहा कि क्षेत्र को आपूर्ति लाइनों को चालू रखना चाहिए और व्यापार तथा निवेश को उदार बनाना जारी रखना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘चीन आर्थिक विकास को गति देने के लिए सुधार और खुलेपन को आगे बढ़ाने में दृढ़ रहेगा।’’ उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण कार्य महामारी से लड़ने और जल्द से जल्द इससे उभरने के लिए हर संभव प्रयास करना है।

न्यूजीलैंड की विदेश मंत्री नानिया महुता ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि एपेक की स्थापना आम सहमति पर हुई थी और 2023 के लिए अभी तक एक निश्चित मेजबान नहीं है।

कुल मिलाकर, एपेक के सदस्य लगभग तीन अरब लोगों और दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा हैं। लेकिन अमेरिका, चीन, ताइवान, रूस और ऑस्ट्रेलिया सहित 21 देशों और क्षेत्रों के असंभावित समूह के माध्यम से गहरा तनाव चलता रहता है।

एशिया के कई देश आर्थिक और भू-राजनीतिक मोर्चों पर चीनी और अमेरिकी प्रभावों को संतुलित करने का प्रयास करते हैं।

चीन दक्षिण चीन सागर और अन्य क्षेत्रों के बड़े भाग पर दावा करता है और कुछ विवादित क्षेत्रों में द्वीपों का निर्माण करते हुए सैन्य उपस्थिति दर्ज कराने के लिए आगे बढ़ा है।