चीन ने पोम्पिओ समेत ट्रंप के कार्यकाल के 27 अधिकारियों के खिलाफ लगाया प्रतिबंध


चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘इन व्यक्तियों और उनके परिवार के सदस्यों के चीनी मुख्य भूमि, हांगकांग और मकाउ में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। उनके, उनसे जुड़ी कंपनियों और संस्थाओं के भी चीन में व्यापार करने पर प्रतिबंध है।’’


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बीजिंग। अमेरिका के नए राष्ट्रपति के रूप में जो बाइडन के शपथ ग्रहण करने के कुछ ही मिनटों बाद चीन ने उसके हितों को ‘‘गंभीर नुकसान’’ पहुंचाने वाले कदम उठाने को लेकर अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और पूर्ववर्ती ट्रंप प्रशासन से जुड़े 27 अन्य लोगों के खिलाफ प्रतिबंध लागू कर दिए।

चीन के विदेश मंत्रालय ने बुधवार देर रात इन प्रतिबंधों की घोषणा की।

इस सूची में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आर्थिक सलाहकार रहे पीटर के नवारो, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट सी ओ ब्रायन, व्हाइट हाउस में पूर्व रणनीतिकार स्टीफन के बैनन, मानव सेवा मंत्री एलेक्स एम अजार और संयुक्त राष्ट्र की राजदूत केली डी के क्राफ्ट शामिल हैं।

इनके अलावा, इस सूची में पूर्ववर्ती ट्रंप प्रशासन के एशियाई एवं प्रशांत मामलों के ब्यूरो के सहायक विदेश मंत्री डेविड आर स्टिलवेल, पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मैथ्यू पोटिंगर, आर्थिक विकास, ऊर्जा एवं पर्यावरण के लिए अवर विदेश मंत्री कीथ जे क्राच और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन के नाम भी शामिल हैं।

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘इन व्यक्तियों और उनके परिवार के सदस्यों के चीनी मुख्य भूमि, हांगकांग और मकाउ में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। उनके, उनसे जुड़ी कंपनियों और संस्थाओं के भी चीन में व्यापार करने पर प्रतिबंध है।’’

बाइडन के शपथग्रहण समारोह के तत्काल बाद इन प्रतिबंधों की घोषणा की गई। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के पूर्ववर्ती प्रशासन के दौरान चीन और अमेरिका के संबंध कारोबार, मानवाधिकार, कोरोना वायरस संबंधी वैश्विक महामारी फैलने और विवादित दक्षिण चीन सागर में चीन के आक्रामक सैन्य कदमों समेत कई मामलों के कारण संबंध बेहद तनावपूर्ण हो गए थे।

हुआ ने कहा, ‘‘पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका में कुछ चीन विरोधी नेताओं ने अपने स्वार्थी राजनीतिक हितों और पूर्वाग्रहों एवं चीन के प्रति नफरत के कारण और चीन एवं अमेरिका के लोगों के हितों का कोई सम्मान न करते हुए ऐसे मूर्खतापूर्ण कदमों की योजना बनाई, उन्हें प्रोत्साहित किया और लागू किया, जिन्होंने चीन के आंतरिक मामलों में गंभीर रूप से हस्तक्षेप किया तथा चीन के हितों को कमजोर किया।’’

चीन ने विशेष रूप से पोम्पिओ पर निशाना साधा।

उल्लेखनीय है कि पोम्पिओ ने चीन पर नए प्रतिबंध लगाते हुए घोषणा की थी कि पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में बीजिंग की मुसलमानों एवं जातीय अल्पसंख्यकों संबंधी नीतियां ‘‘जनसंहार’’ के समान हैं।

हुआ ने इन आरोपों के बारे में कहा, ‘‘पोम्पिओ ने पिछले कई साल में अनगिनत विद्वेषपूर्ण झूठ बोले और आपने जिस मामले का जिक्र किया, वह उन्हीं मनगढ़ंत बातों में से एक है। हमारे लिए पोम्पिओ का तथाकथित संकल्प कागज के एक बेकार टुकड़े से अधिक नहीं है।’’