अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की मौजूदगी की अवधि बढ़ा सकते हैं बाइडन


बाइडन के किसी भी फैसले पर न पहुंचने से अफगानिस्तान में बाकी के 2,500 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने पर रोक लग सकती है और अमेरिका तालिबान के बढ़ते खतरे से जूझ रही अफगान सेना को समर्थन जारी रख सकता है।


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वाशिंगटन। अफगानिस्तान से सेना वापस बुलाने की एक मई की समय-सीमा नजदीक आ रही है लेकिन ऐसा लग रहा है कि राष्ट्रपति जो बाइडन इसके लिए तैयार नहीं हैं।

बाइडन के किसी भी फैसले पर न पहुंचने से अफगानिस्तान में बाकी के 2,500 अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने पर रोक लग सकती है और अमेरिका तालिबान के बढ़ते खतरे से जूझ रही अफगान सेना को समर्थन जारी रख सकता है।

अगले तीन हफ्तों में सभी सैनिकों और उनके उपकरणों को अफगानिस्तान से हटाना मुश्किल होगा।

बाइडन ने कहा, ‘‘एक मई की समय-सीमा को पूरा करना मुश्किल होने जा रहा है। सामरिक कारणों से सैनिकों को वापस बुलाना मुश्किल है। अगर हम छोड़कर जाते हैं तो हमें सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से ऐसा करना होगा।’’

2009 से 2013 तक नाटो के शीर्ष कमांडर रहे पूर्व नौसेना एडमिरल जेम्स स्टेविडिस ने कहा कि इस मौके पर सैनिकों को जल्दी वापस बुलाना नासमझी होगी।

उन्होंने बुधवार को ईमेल के जरिए कहा, ‘‘कई बार कोई फैसला न लेना भी फैसला बन जाता है, जो एक मई की समय-सीमा के मामले में सच लगता है। अब ऐसा लगता है कि छह महीने का विस्तार किया जा सकता है और तालिबान को अपने वादे पूरे करने के लिए राजी करने की कोशिश की जा सकती है जो अफगानिस्तान से सैनिकों को वापस बुलाने की अहम शर्त है।’’



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