उत्तर प्रदेश को ‘उद्यम प्रदेश’ में तब्दील करता “योगी मॉडल”


सरकार ने भी नई एमएसएमई यूनिट स्थापित करने में समस्याओं को दूर करने के क्रम में एनओसी के नियमों का सरलीकरण किया है साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए अनापत्ति देकर इसकी समयसीमा भी तय की है।



एक तरफ कोरोना महामारी की विभीषिका दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उत्तर प्रदेश को “उद्यम प्रदेश” बनाने का संकल्प। संघर्ष विकराल, हालात मुखालिफ, चुनौतियां बेहिसाब फिर भी योगी का यूपी को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास!

यह आश्चर्यजनक जरूर है लेकिन अविश्वसनीय कतई नहीं। कोरोना काल की दुरूह परिस्थितियों में भी उत्तर प्रदेश में सुरक्षित “जीवन और जीविका” की स्थिति ने हिंदोस्तान की सियासत को असंभव को भी संभव बनाने के फन में माहिर ‘राजयोगी’ की संकल्पशक्ति से परिचित कराया था।

आज उन्हीं संकल्पवान योगी से देश की आर्थिक राजधानी मुंबई रूबरू हो रही है। सिने जगत से लेकर उद्यमिता के नभ पर चमचमाते लगभग 100 सितारों से उनकी भेंट “आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” की दिशा में बढ़ाया गया महत्वपूर्ण कदम है। बीएसई में लखनऊ नगर निगम के बांड्स की सूचीबद्धता के साथ ही योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के नगरीय विकास में नए युग का सूत्रपात हो गया है।

यह योगी सरकार के प्रति निवेशकों का विश्वास ही कहा जाएगा कि अभी हाल ही में लखनऊ नगर निगम द्वारा जारी किए गए ₹200 करोड़ के बांड्स को कोविड काल में भी निवेशकों ने हाथों हाथ लिया। परिणामतः 225 प्रतिशत फेस वैल्यू प्राप्त हुई और ₹450 करोड़ की धनराशि अर्जित हुई। ध्यातव्य है कि मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में पहुंचने वाले उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री हैं योगी आदित्यनाथ।

दरअसल योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की बदली कार्य संस्कृति, बेहतर कानून व्यवस्था, युद्ध गति से तैयार हो रहे आधारभूच ढांचे ने यूपी को निवेशकों का ‘ड्रीम लैण्ड’ बना दिया है। आज आलम यह है कि जब कोरोना की विभीषिका में दुनिया भर की व्यावसायिक कम्पनियां अपना धन निकालने में जुटी हैं।

इस संकट काल में 10 देशों की 40 कम्पनियां उत्तर प्रदेश में 45,000 करोड़ रुपये का निवेश करने हेतु आगे आयी हैं। इनमें से करीब 1.35 लाख रोजगार से जुड़ी परियोजनाओं का क्रियान्वयन शुरू भी हो गया है।

दीगर है कि सैमसंग अपनी डिस्प्ले यूनिट चीन के स्थान पर उत्तर प्रदेश में लगा रहा है। अप्रैल से कामर्शियल उत्पादन भी शुरू हो जाएगा। ध्यातव्य है कि यह कंपनी पहले ₹1500 करोड़ का निवेश करने वाली थी। कोविड काल में इस प्रस्ताव को बढ़ाकर ₹4800 करोड़ किया गया है। यही नहीं माइक्रोसाफ्ट का तीसरा कैंपस नोएडा में प्रस्तावित है।

दरअसल योगी ने उत्तर प्रदेश को उद्यम प्रदेश में तब्दील करने के लिए “नीति से लेकर क्रियान्वयन” तक युगांतकारी परिवर्तन किए। निवेशकों की सुविधा के लिए 52 प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया। उद्योग लगाने हेतु आसानी से भूमि उपलब्ध कराने की मंशा से राजस्व संहिता के प्राविधानों को सरलीकृत करने की दिशा में कार्य हुआ।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्योगों के लिए लैंडबैंक जुटाने के भी निर्देश दिए हैं। उद्यम अनुकूल वातावरण के सृजन के फलस्वरूप ही उत्तर प्रदेश ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में 12 अंक की छलांग लगाकर देश में दूसरे स्थान पर आ गया है।

यूपी को एक ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने के स्वप्न को हकीकत का जामा पहनाने के लिए योगी के द्वारा किए गए विकास कार्य अत्यंत सहयोगी सिद्ध हो रहे हैं। जैसे देश की राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का इलाका, जो धीरे-धीरे मुंबई की जगह देश की आर्थिक राजधानी के तौर पर तब्दील हो रहा है, उसमें काफी बड़ा हिस्सा यूपी का है। जेवर में भी योगी सरकार, नया विमानपत्तन विकसित कर रही है। ये तमाम तथ्य उ.प्र. के संदर्भ में निवेशकों को अनुकूलता प्रदान कर रहे हैं।

दीगर है कि उत्तर प्रदेश में एमएसएमई, खाद्य-प्रसंस्करण, ऑटोमोबाइल, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो-कंपोनेंट्स, रक्षा क्षेत्र तथा बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स आदि में संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान आदि देशों की कंपनियों के लिए अपार संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं को साकार आकृति देने के लिए उ.प्र सरकार निवेशकों को प्रत्येक स्तर पर सहयोग कर रही है।

इसी क्रम में नए उद्योगों को आसानी से स्किल्ड लेबर उपलब्ध कराने के लिए क्वारंटीन सेंटरों में सेवायोजन विभाग के माध्यम से प्रवासी श्रमिकों की स्किल मैपिंग का काम कराया गया था, इससे बड़े मानव संसाधन की जीविका भी सुनिश्चित होगी।

वैसे भी उत्तर प्रदेश में पिछले तीन सालों में निवेश का माहौल बना है। इन्वेस्टर्स समिट, ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी और डिफेंस एक्सपो से प्रदेश में निवेश की संभावनाओं को नए आयाम मिले हैं। गौरतलब है कि योगी सरकार ने फरवरी 2018 में हुई इन्‍वेस्‍टर्स मीट में निवेशकों के साथ ₹4.68 लाख करोड़ रुपये के एमओयू किए थे, जिनमें से करीब 2 लाख करोड़ की योजनाएं धरातल पर आकार ले चुकी हैं।

यहां एक बात और काबिल-ए-गौर है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) आर्थिक विकास के इंजन हैं। यह क्षेत्र कम पूंजी में अधिक रोजगारों का सृजन करता है। उ.प्र. सरकार के अनुसार प्रदेश में लगभग 90 लाख एमएसएमई यूनिटे हैं। सरकार द्वारा 7.31 लाख नई और पुरानी एमएसएमई इकाइयों को 21,000 करोड़ रुपये का ऋण प्रदान कर उन्हें पुनर्जीवित करने हेतु आक्सीजन प्रदान की गई है।

पुनर्जीवित हो रहीं एमएसएमई इकाइयां न सिर्फ रोजगार सृजन का बड़ा कारक बन रही हैं बल्कि ‘स्किल्ड लेबर’ के समायोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ध्यातव्य है कि प्रदेश में अभी वृहद एवं एमएसएमई में 50 लाख से अधिक रोजगार प्राप्त किए गए हैं।

सरकार ने भी नई एमएसएमई यूनिट स्थापित करने में समस्याओं को दूर करने के क्रम में एनओसी के नियमों का सरलीकरण किया है साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए अनापत्ति देकर इसकी समयसीमा भी तय की है। वहीं, नई यूनिट लगाने वाले हर उद्यमी को आसान शर्तों पर बैंकों से ऋण की व्यवस्था की गयी। उल्लेखनीय है कि मंदी के बावजूद पिछले तीन वर्षों में प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि में इस सेक्टर का महत्वपूर्ण योगदान है।

अयोध्या, काशी और मथुरा के पुरातन गौरव की पुनर्स्थापना के लिए किए जा रहे प्रयासों से उत्सर्जित सकारात्मक ऊर्जा विश्व भर के सनातनियों को अपनी ओर खींच रही है। सनातन आस्था के लाखों ‘उद्यमी अनुयायियों’ के मन में उत्तर प्रदेश में निवेश की लालसा का बीजांकुरण हो गया है। कुछ समय पश्चात यह अवश्य ही “निवेश वृक्ष” के रूप में सुफलित होगा।

फिल्म सिटी के निर्माण की तैयारियां उत्तर प्रदेश के निजाम के बहुआयामी विकास के नजरिए का एक आयाम है जो भविष्य में हजारों करोड़ रुपए के निवेश एवं लाखों रोजगार के सृजन का माध्यम बनेगा। ‘स्वदेशी से स्वालंबन’ मंत्र को चरितार्थ करती “एक जनपद-एक उत्पाद” योजना, योगी सरकार की परिवर्तनगामी दृष्टि का आइना है, जिसमें ‘स्पेशल इंडस्ट्री’ के रूप में प्रत्येक जनपद का अक्स उभर रहा है।

यह “पलायन और पूंजी” दोनों को नियंत्रित कर स्थानीयता को जीवित रखते हुए जीविका को सुरक्षित रखने में सहयोगी सिद्ध हो रही है। एक तापस वेशधारी राजयोगी के शासन में ही ऐसे ‘प्रकृति अनुकूल’ विकास की आशा की जा सकती है।

‘संक्रमण और संभावना’ के संधिकाल पर योगी सरकार की नीतियों, कुशल नियोजन व उनके सुगम क्रियान्वयन ने बहुराष्ट्रीय व स्थानीय कंपनियों को आकर्षित कर प्रदेश को ‘औद्योगिक निवेश’ का बड़ा हब बनाने की बुनियाद रख दी है। जिस पर “उद्यम प्रदेश” का विराट स्वप्न सहजता से आकार प्राप्त करने लगा है। एक “राजयोगी” के नेतृत्व में “आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” स्पंदित हो रहा है।