उत्तर प्रदेश में ‘निर्माण’ का नव प्रभात


एक तापस वेशधारी की रहनुमाई में उत्तर प्रदेश आज ‘उत्कृष्ट प्रदेश’ में तब्दील हो रहा है। विकास के स्वर्णिम अध्याय की रचना कर रहा यूपी सहकार, समन्वय और सुशासन की बेमिसाल नज़ीर बन गया है।



एक तापस वेशधारी की रहनुमाई में उत्तर प्रदेश आज ‘उत्कृष्ट प्रदेश’ में तब्दील हो रहा है। विकास के स्वर्णिम अध्याय की रचना कर रहा यूपी सहकार, समन्वय और सुशासन की बेमिसाल नज़ीर बन गया है।

‘नेतृत्व’ के महत्व को रेखांकित करती उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की साढ़े चार वर्षों की निर्माण यात्रा ‘कायाकल्प’ का वह स्तर है जिसे ‘करिश्मा’ कहना अधिक समीचीन होगा।

दीगर है कि कभी संगठित अपराध, सुव्यवस्थित भ्रष्टाचार, मज़हबी दंगों, बेरोज़गारी और कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति की पहचान रखने वाले उत्तर प्रदेश का आज विकास के मानक के रूप में स्थापित होना, किसी चमत्कार से कम नहीं है।

अब सवाल यह है कि प्रदेश भी वही, लोग भी वही, तंत्र भी वही, फिर यह चमत्कार हुआ कैसे? वह कौन सी कारीगरी है, जिसने दशकों से अराजकता और अव्यवस्था के अंधकार में डूबे प्रदेश को प्रगति के आसमान का चमकता आफताब बना दिया। ऐसा क्या हो गया कि माफियाओं की ‘नर्सरी’ कहलाने वाला प्रदेश निवेशकों का ड्रीम डेस्टिनेशन बन गया है।

दरअसल यह चमत्कार वर्ष 2017 में प्रदेश की बागडोर संभालने वाले योगी आदित्यनाथ के रचनाधर्मी नेतृत्व की ‘साफ नीयत और स्पष्ट नीति’ का सुफल है। उन्होंने सबसे पहले हुकूमत को खिदमत का पाठ पढ़ाते हुए प्रदेश की कार्य-संस्कृति को जन पक्षीय बनाया।

योगी जानते थे कि आस्था से आजीविका तक, अवस्थापना से उद्यमिता तक, चिकित्सा से शिक्षा तक, सृजन से सुरक्षा तक, असंगठित से संगठित तक सभी क्षेत्रों को यदि विकास की ध्वनि तरंगों से झंकृत करना है तो कनेक्टिविटी को बढ़ाना और क्राइम को कम करना बुनियादी शर्त है।

पिछड़ेपन का मुख्य कारण ज्ञात हो चुका था, लिहाजा निवारण पर कार्य करते हुए योगी की ज़ीरो टॉलरेंस नीति ने माफियाओं की लंका को ढहाना शुरू कर दिया। जिनके हुक्म की तामील करने को कल तक हुक्मरान बेताब थे, उन दुर्दांत माफियाओं की छोटी-बड़ी लंकाएं एक योगी के ताप से दहकने लगीं। कभी माफियाओं के लिए अभयारण्य रहा प्रदेश अब उनके लिए दावानल बन चुका है। योगी सरकार द्वारा ‘बड़े’ माफियाओं की 1848 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल अवैध सम्पत्तियों पर शिकंजा कसने से भयमुक्त समाज की अवधारणा को आकार मिला। जिसने आमजन समेत राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के मन में सरकार नामक व्यवस्था के प्रति एक विश्वास कायम किया।

क्राइम कंट्रोल के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों और दूसरे राज्यों के मध्य सहज, सरल और द्रुतगामी कनेक्टिविटी के लिए योगी सरकार द्वारा युद्ध स्तर पर निर्माणधीन गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे आदि से प्रदेश में विकासपरक वातारण का निर्माण हुआ। आज प्रदेश में 5 इंटरनेशनल एयरपोर्ट सहित 8 एयरपोर्ट संचालित हैं, जबकि 13 अन्य हवाई अड्डों एवं 7 हवाईपट्टी का विकास हो रहा है।

यह योगी के भागीरथी प्रयासों का ही प्रतिफल है कि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के राष्ट्रीय सूचकांक में उत्तर प्रदेश 12वें स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच गया। इसने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के मन में उत्तर प्रदेश के प्रति सकारात्मक परसेप्शन का निर्माण कर प्रदेश को निवेश की नर्सरी बना दिया। कोरोना काल में जब सभी उद्यमी अपने धन को सुरक्षित करने में लगे थे, तब अनेक देशों के उद्यमी चीन के स्थान पर यूपी में निवेश कर रहे थे।

तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक धनराशि का निवेश बताता है कि कभी बीमारू राज्य कहे जाने वाला यूपी आज दुनिया के लिए व्यापक संभावनाओं वाला प्रदेश बन गया है।

यह योगी की दूरदर्शी नीतियों का ही प्रतिफल था कि वैश्विक महामारी कोरोना की विभीषिका में जब अनेक विकसित देश हांफ रहे थे, उस संक्रमण काल में भी उत्तर प्रदेश में ‘जीवन और जीविका’ सुरक्षित थीं। एक दिन में सवा करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देने का कीर्तिमान और एक दिन में सबसे अधिक निःशुल्क खाद्यान्न वितरण का ऐतिहासिक कार्य भी योगी-नेतृत्व की उपलब्धि है। इसके साथ ही इंडिया स्मार्ट सिटीज अवार्ड-2020 में प्रदेश को प्रथम पुरस्कार मिलना, ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत देश में सबसे अधिक शौचालय का निर्माण होना, गन्ना, चीनी, गेहूं, आलू, मटर, आम, आंवला और दुग्ध उत्पादन में यूपी का प्रथम स्थान पर होना, प्रदेश की बदली हुई कार्य संस्कृति का ही सुफल है।

पूर्ववर्ती सरकारों के समय सरकारी नियुक्तियों का विवादित होकर न्यायालय की चौखट तक पहुंचना आम बात थी, लेकिन योगी सरकार की साढ़े चार लाख नियुक्तियों में से एक का भी कोर्ट में विचाराधीन न होना योगी सरकार की बदली हुई कार्य संस्कृति का सबसे बड़ा उदाहरण है।

रोजगार की नई संभावनाओं के सृजन हेतु योगी सरकार के गंभीर प्रयासों का परिणाम है कि मार्च, 2021 में प्रदेश की बेरोजगारी दर घटकर 4.1 प्रतिशत रह गई,* जो कि वर्ष 2017 में 17.5 फीसदी थी।

दरअसल जब व्यवस्था ‘अंत्योदय’ के सांचे में विकास को ढाल कर अपनी नीतियों का निर्माण करती है तब जनपक्षीय व लोक कल्याणकारी सृजन आकार लेता है।

अब देखिए न, वर्ष 1947 से लेकर वर्ष 2016 के दरम्यान देश की सबसे ज्यादा आबादी वाले प्रदेश में कुल 12 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि वर्ष 2017 से 2021 के बीच महज साढ़े चार सालों में 32 नए राजकीय मेडिकल कॉलेज बन चुके हैं। यह है लोक कल्याणकारी सृजन। अंत्योदय के ध्येय के साथ कार्य कर रही योगी सरकार ने बंगले नहीं, बल्कि गरीबों के लिए 43 लाख से अधिक आवास बनवाए हैं। यह है जन पक्षधरता।

दशकों से उपेक्षित पड़े भारतीय आस्था के प्राचीनता केंद्रों को योगी के नेतृत्व में नया जीवन मिला है। धार्मिक पर्यटन के रूप में आस्था को अर्थव्यवस्था से जोड़ने का कार्य एक योगी के ही राज में संभव था। आज अयोध्या, काशी, मथुरा, चित्रकूट समेत अनेक केंद्र अंतरराष्ट्रीय सुविधाओं के साथ पर्यटन के विश्व मानचित्र पर चमक रहे हैं। अयोध्या में दीपोत्सव तथा बरसाना में रंगोत्सव की क्या पूर्ववर्ती सरकारों में कल्पना भी की जा सकती थी?

जिस प्रकार एक संत बगैर किसी भेदभाव के प्राणी मात्र के उत्थान के लिए मंगलकामना करता है, उसी प्रकार विगत साढ़े चार वर्षों में योगी की अगुवाई में किसानों, वंचितों, महिलाओं समेत समाज के सभी कमजोर तबकों के उन्नयन के लिए बगैर किसी भेदभाव के कार्य हुआ।

शिक्षा के आलोक से प्रदेश के कोने-कोने को आलोकित करने के मंशा से योगी के नेतृत्व में प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक ‘नव निर्माण’ के एक नए युग का सूत्रपात हुआ है। 1.38 लाख सरकारी स्कूलों का कायाकल्प, 4 नए राज्य विश्वविद्यालय, 51 नए राजकीय महाविद्यालय, 28 इंजीनियरिंग कॉलेज, 26 पॉलीटेक्निक, 79 आई.टी.आई. 250 नए इंटर कॉलेज और 771 कस्तूरबा विद्यालयों की स्थापना एवं श्रमिकों के बच्चों की निःशुल्क शिक्षा हेतु 18 मंडलों में अटल आवासीय विद्यालयों की स्थापना उसका ही एक हिस्सा है।

समाज के सर्वांगीण विकास को समर्पित अनेक कार्य जैसे निःशुल्क बिजली कनेक्शन, बालिकाओं को निःशुल्क शिक्षा, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था, स्वयं सहायता समूह के माध्यम से मातृशक्ति को रोजगार से जोड़ने का अभिनव प्रयास आदि “अंत्योदय से समाजोदय” की संकल्पना को साकार कर रही हैं।

दशकों से उत्तर प्रदेश की विकास भूमि पर काबिज दुर्व्यवस्था के अंधकार रूपी अतिक्रमण को मात्र साढ़े चार वर्षों में सुशासन के आलोक से हर रहीं प्रगति की रश्मियां ‘नए उत्तर प्रदेश’ में निर्माण के ‘नव प्रभात’ का ऐलान करते हुए कह रही हैं कि यह योगी का उत्तर प्रदेश है। यहां हर अतिक्रमण पर बुलडोजर चलता है।