झील का बंध टूटने से मुसीबत में कई परिवारों की जिंदगी


ग्रामीणों ने बताया कि झील के ओवरफ्लो होकर टूटने व मकानों तक पानी पहुंचने की सूचना उनके द्वारा प्रशासन को दी गई, लेकिन 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली। प्रशासन की ओर से मौके पर पानी की रोकथाम के लिए कोई व्यवस्था नहीं कराई गई है।


भास्कर न्यूज भास्कर न्यूज
उत्तर प्रदेश Updated On :

कैराना। मामौर झील के ओवरफ्लो होकर टूटने से हालात बदतर हो गए हैं। पानी ने आधा दर्जन से अधिक मकानों को अपनी जद में ले लिया है। जहां कई दीवारें व शौचालय भी धराशायी हो चुके हैं। जबकि मकानों में दरारें आ गई हैं। इस वजह से कई परिवारों की जिंदगी भी खतरे में पड़ती नजर आ रही है। झील टूटने के 24 घंटे बाद भी प्रशासन राहत बचाव कार्य नहीं कर सका है। इससे लोगों में भारी आक्रोश भी बना हुआ है।

गांव मामौर में स्थित झील के बरसात के चलते मंगलवार को ओवरफ्लो हो जाने के कारण किसानों की सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई। झील के पानी ने गांव के बाहरी छोर पर बने आधा दर्जन से अधिक मकानों को अपने आगोश में ले लिया है। हालात यह है कि घरों से बाहर जाने से तमाम रास्ते भी बंद हो गए हैं। 

झील के पानी के कारण कारण मुनव्वर, तसव्वुर व सरवर पुत्रगण शराफत के मवेशियों के लिए बनाए गए बरामदे, दो शौचालय, रसोई व चारदीवारी धराशायी हो गई। मवेशियों के लिए उगाई गई ज्वांर की करीब पांच बीघा फसल भी जलमग्न हो गई हैं। अय्यूब व तैय्यब पुत्रगण शौकत के घर की चारदीवारी व शौचालय भी भर-भराकर गिर गया। 

इसी प्रकार इस्तिखार व नदीम पुत्रगण इलियास, सलमान, सरवेज, फरमान पुत्रगण नासिर के घरों के शौचालय भी गिर गए। जावेद, अमजद, शाहरुख पुत्रगण कामिल का मवेशियों का बरामदा ढह गया। जबकि मकान की दीवार में दरारें आ गई हैं। उनकी मवेशियों के लिए बोई गई ज्वांर की करीब दो बीघा फसल भी पानी में समां गई है। इनके परिवारों की जिंदगी भी मुसीबत में आ गई है, क्योंकि परिवार के लोग पानी भरा होने के कारण घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। मकानों को भी खतरा पैदा हो गया है। ये परिवार बेहद चिंतित हैं।

दो साल पूर्व गिरा मकान भी जद में

करीब दो वर्ष पूर्व भी मामौर झील टूट गई थी, जिसमें कामिल का मकान जमींदोज हो गया था। हादसे में जहां घरेलू सामान को भारी नुकसान हुआ था, तो वहीं परिवार के सदस्य भी बाल-बाल बच गए थे। कुछ को चोटें भी आई थीं। इसके बाद कामिल ने जैसे-तैसे करके अपना मकान बनाया था। यह मकान भी वर्तमान में झील के पानी के बीचों-बीच खड़ा है। 

किसानों पर लगा पानी तोड़ने का आरोप

पीड़ित मुनव्वर ने बताया कि मामौर झील के पानी से कुछ किसान अपने खेतों में सिंचाई करते हैं। आरोप है कि चार किसानों द्वारा जान-बूझकर पानी उनके मकानों की ओर तोड़ा गया है, क्योंकि सिंचाई के दौरान उनके खेतों में अधिक पानी भर गया था, जिस कारण अब यह विकराल समस्या खड़ी हो गई है।

24 घंटे बाद भी प्रशासन बेपरवाह

ग्रामीणों ने बताया कि झील के ओवरफ्लो होकर टूटने व मकानों तक पानी पहुंचने की सूचना उनके द्वारा प्रशासन को दी गई, लेकिन 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली। प्रशासन की ओर से मौके पर पानी की रोकथाम के लिए कोई व्यवस्था नहीं कराई गई है। हालांकि, बुधवार को प्रशासन के निर्देश पर नगरपालिका की एक जेसीबी मशीन को पानी की रोकथाम के लिए मौके पर भेजा गया था, लेकिन रास्ता ठीक नहीं होने के कारण मशीन आगे तक नहीं जा पाई, जिस कारण कोई मेड़बंदी भी नहीं कराई जा सकी है।

क्यों ओवरफ्लो होती है झील ?

कैराना की निकासी का गंदा पानी नाले के माध्यम से मामौर झील में समाता है। अक्सर बरसात के मौसम में झील पर पानी का दबाव बढ़ जाता है और झील ओवरफ्लो होकर टूट जाती है। पूर्व में भी झील भारी तबाही मचा चुका है। इससे निजात का स्थायी विकल्प भी प्रशासन नहीं तलाश पाया है।

सीवेज प्लांट की प्रक्रिया लटकी

झील से बर्बादी को देखते हुए प्रशासन इसके हल के लिए स्थायी विकल्प तलाशने का दावे करता रहा है। पिछले दिनों नमामि गंगे के ज्वाइंट सेक्रेट्री भी यहां झील का जायजा लेने के लिए पहुंचे थे और उस समय सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए सहमति बनी थी। इसके बाद जमीन भी चिह्नित की गई थी, लेकिन प्लांट स्थापना की प्रक्रिया भी लटक गई है।

झील का किया निरीक्षणः एसडीएम

एसडीएम उद्भव त्रिपाठी का कहना है कि उनके द्वारा बुधवार को मामौर झील का निरीक्षण किया गया है। राजस्व टीम को भी मौके पर भेजा गया है। मिट्टी की ढांग लगाकर पानी की रोकथाम कराए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि किसानों की धान की कुछ फसलों में पानी घुसा है। दीवारें व शौचालय गिरने की जानकारी नहीं हैं। यदि ऐसा हुआ है, तो इसकी रिपोर्ट तैयार कराई जाएगी।