खुद हार्ट के पेशेंट हैं बलिया के अयूब खान, लोगों को मरते देखा तो बना दिया देसी ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर


गैराज में काम करने वाले मिस्त्री अयूब खान की ओपन हार्ट सर्जरी लखनऊ के पीजीआई में हो चुकी है। खुद हार्ट का पेशेंट होने के बावजूद उन्होंने लोगों को ऑक्सीजन सिलिंडर के भागते हुए देखा तो उनसे रहा नहीं गया। अयूब खान ने बताया कि मैंने टीवी चैनलों पर देखा कि लोग अपनों की जान बचाने के लिए मुंह से ऑक्सीजन दे रहे थे।


Ritesh Mishra Ritesh Mishra
उत्तर प्रदेश Updated On :

नोएडा/बलिया। उत्तर प्रदेश का पूर्वी क्षेत्र और बिहार से सटा बलिया जिला किसी परिचय का मोहताज नहीं है। आज़ादी की लड़ाई हो या देश के दुश्मनों से मुकाबला, ये जिला कभी पीछे नहीं रहा है। इन दिनों देश का हर राज्य, हर जिला यहां तक कि गांव सभी वैश्विक महामारी कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। कोरोना के बदलते स्ट्रेन और ऑक्सीजन की कमी के चलते काफी संख्या में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

एक तरफ जहां ऑक्सीजन की कालाबाजारी के चलते लोग मौत के मुंह में समा रहे थे और मुंहमांगी कीमत के बावजूद ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं मिल पा रहा था, ऐसे वक़्त में बलिया जिले के परमंदापुर के रहने वाले मिस्त्री अयूब खान ने देसी जुगाड़ से एक ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर बना डाला। अब इस देसी ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर के इस्तेमाल के लिए प्रशासनिक मंजूरी का इन्तजार है।

ऐसे में यदि सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले दिनों में लोगों को ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए भागना नहीं पड़ेगा। अयूब खान कहते हैं कि इस देसी जुगाड़ यानि देसी ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर की मदद से एक साथ आधा दर्जन मरीजों को आसानी से ऑक्सीजन दिया जा सकेगा। खान बताते हैं कि टैंक में कंप्रेसर के जरिए बाहर की हवा आती है जिसे कई दफा फ़िल्टर किया जाता है।

गैराज में काम करने वाले मिस्त्री अयूब खान की ओपन हार्ट सर्जरी लखनऊ के पीजीआई में हो चुकी है। खुद हार्ट का पेशेंट होने के बावजूद उन्होंने लोगों को ऑक्सीजन सिलिंडर के भागते हुए देखा तो उनसे रहा नहीं गया। यूपी भास्कर डॉट कॉम से बात करते हुए अयूब खान ने बताया कि मैंने टीवी चैनलों पर देखा कि लोग अपनों की जान बचाने के लिए मुंह से ऑक्सीजन दे रहे थे।

अयूब खान ने सोचा कि जिस ऑक्सीजन का इस्तेमाल गैस कटर, गैस वेल्डिंग के लिए किया जा रहा है, वही ऑक्सीजन अस्पताल में भी मरीजों की जान बचाने के लिए भेजा जा रहा है। यही देखकर उनके दिमाग में आया कि क्यों न एक ऐसा देसी जुगाड़ बनाया जाए जिससे मरीजों को आसानी से ऑक्सीजन मिले और वो गरीबों के लिए भी उपलब्ध हो। खान कहते हैं कि यही सोचकर उन्होंने ये देसी ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर बनाने का फैसला किया।

शहर से सटे परमंदापुर के रहने वाले अयूब मिस्त्री बहेरी में तकरीबन चालीस सालों से मोटर गैराज चलाते हैं। अयूब मिस्त्री बताते हैं कि बीस दिन पहले एक व्यक्ति ऑक्सीजन रेग्युलेटर के लिए मेरे पास इस आस में आया कि शायद मैं किसी जुगाड़ से तैयार कर दे दूंगा। मैंने किसी तरह उसके लिए रेग्युलेटर का इंतजाम कर दिया था। उस इंसान की आंखों में ऑक्सीजन के लिए तड़प देख मैंने उसी दिन तय किया कि ऑक्सीजन का यंत्र मुझे भी तैयार करना चाहिए।

इसके बाद वाहनों में हवा भरने के लिए प्रेशर टैंक को मैंने देसी ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर के रूप में तैयार करने में जुट गया। अयूब बताते हैं कि बीस दिन लगातार मेहनत के बाद देश का पहला देसी ऑक्सीजन प्लांट तैयार है। इसमें पांच कुंतल ऑक्सीजन स्टोर करने की क्षमता है। जो पांच घंटे में भरेगा। वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन को चार चरणों में फिल्टर करके मरीजों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा।

इस देसी मशीन से एक साथ छह लोगों को ऑक्सीजन सप्लाई किया जा सकता है। यदि हॉस्पिटल के पाइप लाइन से सप्लाई किया जाए तो एक साथ बीस मरीजों को दिया जा सकता है। अयूब कहते हैं कि इस मशीन को मरीजों के करीब रखने की भी जरूरत नहीं है। मशीन को दूर रखकर पाइप के सहारे मरीजों तक ऑक्सीजन आसानी से पहुँचाया जा सकता है।