उत्तर प्रदेश के आकाश पर आशाओं का ‘आदित्य’


उत्तर प्रदेश गोवध निवारण(संशोधन) अध्यादेश, 2020, उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश-2020, निजी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले उपद्रवियों से वसूली हेतु ‘उत्तर प्रदेश रिकवरी ऑफ डैमेज टू पब्लिक एंड प्राइवेट प्रापर्टी अध्यादेश-2020’ जैसा ऐतिहासिक कानून भी इसी साल लागू हुआ।



समय के द्वार पर आंग्ल नूतन वर्ष अपनी प्रथम भोर की सुखद मनुहार के साथ नई संभावनाओं की दस्तक दे रहा है। परिवर्तन की शाश्वतता का संदेश देता ‘समय’ आशा, अपेक्षा और अभिलाषाओं की रश्मियों को अपनी अंजुरी में भर कर वर्ष 2021 के लोक मंगलकारी होने की मुनादी कर रहा है। अतीत और आगत के संधि बिंदु पर खड़ा होकर जब मैं देखता हूं तो समय का यह उद्घोष मुझे सत्य प्रतीत होता है।

वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण से तड़पती मानवता के उद्धार के लिए स्वदेशी ‘कोरोना वैक्सीन’ के निर्माण और कोविड-19 जनित आर्थिक महात्रासदी से देश की अर्थव्यवस्था की मुक्ति का साक्षी बनता यह ‘नव प्रभात’ अपने आलोक से आपदा के अंधकार को परास्त कर ‘नए भारत के नए उत्तर प्रदेश’ के लिए ‘नई संभावनाओं’ का द्वार खोल रहा है।

संभावना, कृषकों के उत्थान की, संभावना, नवोन्मेष की, संभावना वंचितों, शोषितों और महिलाओं के उन्नयन की, संभावना, उद्यमिता के उत्कर्ष की, संभावना, शिक्षा, स्वावलम्बन, स्वास्थ्य और सुरक्षा के सुदृढ़ता की।

कोरोना की विभीषिका के सम्मुख, संभावनाओं का यह स्वर्णिम परिपथ, एक तापस वेशधारी की संकल्प शक्ति, अक्षय ध्येयनिष्ठा, कुशल नियोजन एवं अपूर्व रचनाधर्मिता की आधारशिला पर निर्मित हुआ है।

आश्चर्यजनक है कि कोरोना संक्रमण की विभीषिका के मध्य उत्तर प्रदेश, वैश्विक उद्यमिता के आकाश पर एक नई संभावना बन कर उभरा है। किंतु यह सब इतना आसान नहीं था।

अभी वर्ष 2017 की भोर भी ठीक से खत्म नहीं हुई थी कि वैश्विक महामारी कोरोना ने पूरी मानवता को अपने खूनी शिकंजे जकड़ लिया। ऐसी महामारी जिसके सम्मुख वैश्विक महाशक्तियां तक लाचार थीं। किन्तु “स्वानुशासन, स्वच्छता और सोशल डिस्टेंसिंग” के मंत्र को व्यवहार में ढालते हुए, युद्धस्तर पर कोरोना टेस्टिंग का अभियान संचालित कर संक्रमितों को अविलम्ब उपचार उपलब्ध कराते हुए उत्तर प्रदेश ‘जान, जहान और जीविका’ को सुरक्षित रख पाने में सफल रहा।

यूपी के कोविड प्रबंधन की वैश्विक स्तर पर सराहना की गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन से लेकर पाकिस्तान के मीडिया जगत में उत्तर प्रदेश की कोरोना संघर्ष रणनीति की मुक्त कंठ से प्रशंसा हुई।

कोरोना जनित बेशुमार चुनौतियों के सैलाब को पार करते हुए योगी आदित्यनाथ ने आपदा को अवसर में बदला। आज आलम यह है कि उद्योग अनुकूल नीतियों, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और अपरिमित मानव संपदा की त्रिवेणी से सिंचित उत्तर प्रदेश की उर्वर भूमि पर तीव्र, धारणीय और समावेशी विकास की फसल लहलहा रही है।

‘ईज आफ डूइंग बिजनेस’ में उत्तर प्रदेश का दूसरे पायदान पर पहुंचना उद्यमियों एवं निवेशकों की प्रदेश में बढ़ती रूचि का परिचायक है तभी तो कोविड-19 महामारी के दौरान जब विश्व भर के व्यावसायिक प्रतिष्ठान अपने धन को निकालने के लिए प्रयत्नशील हैं उस संक्रमणकालीन समय में 10 देशों की कई दर्जन कम्पनियां उत्तर प्रदेश में 45,000 करोड़ रुपये का निवेश करने हेतु आगे आयी हैं।

विश्व प्रसिद्ध सैमसंग मोबाइल कम्पनी अपनी डिस्प्ले यूनिट चीन के स्थान पर उत्तर प्रदेश में लगा रहा है और माइक्रोसाफ्ट का तीसरा कैंपस नोएडा में प्रस्तावित है। यही नहीं जर्मनी की फुटवियर कंपनी ”वॉन वेलेक्स” ने तो उत्तर प्रदेश के आगरा में जूता बनाने की दो यूनिट शुरू भी कर दी हैं। अब तक कुल 2000 लोगों को रोजगार मिल चुका है। विदित हो वॉन वेलेक्स कंपनी यूपी में अपनी तीन परियोजनाओं में लगभग ₹300 करोड़ का निवेश करेगी।

हैरतंगेज है किंतु सत्य है कि योगी के नेतृत्व में कोरोना की विभीषिका के मध्य ही दशकों से कायम अनेक समस्याओं के निदान की बुनियाद भी रखी गयी। जैसे आजीविका हेतु पलायन की विवशता को समाप्त करने के लिए अंकुरित ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ के विचार को आकार देते हुए विकास के ग्रोथ इंजन कहे जाने वाले एमएसएमई सेक्टर की लगभग 14.05 लाख से अधिक इकाइयों को सिर्फ कोरोना कालखण्ड में ₹39,390 करोड़ का ऋण प्रदान किया। गौरतलब है कि इससे लगभग 30 लाख से अधिक आजीविका के अवसर सृजित हुए।

उत्तर प्रदेश को उद्यम प्रदेश में परिवर्तित करने, निवेश मार्ग में आ रही बाधाओं को अविलम्ब दूर करने हेतु “इन्वेस्ट यूपी” की नींव भी कोरोना काल के मध्य रखी गई। 40 लाख से अधिक प्रवासी श्रमिकों एवं कामगारों को सकुशल उनके घर तक पहुंचाने के युगांतकारी कार्य के पश्चात श्रमिकों एवं कामगारों के हितों के संरक्षण तथा उनकी सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में योगी सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश कामगार और श्रमिक (सेवायोजन एवं रोजगार) आयोग के गठन ने उ.प्र.शासन के “अभिभावकत्व” से देश की राज व्यवस्था को परिचित कराया। इस अभिनव पहल ने अन्य राज्यों को भी इस दिशा में विचार करने के लिए प्रेरित किया।

काबिल-ए-गौर है कि उत्तर प्रदेश का प्रत्येक जनपद, अद्वितीय शिल्प के वरदान से अभिसिंचित है। ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ के द्वारा हर पारम्परिक शिल्प में समयानुकूल मूल्य अभिवर्धन कर, उसे आवश्यक संसाधन मुहैया कराकर नई ऊंचाइयां देने का कार्य वर्ष-2020 की चुनौतियों के बीच भी लगातार जारी रहा।

उसी क्रम में कल भी मुख्यमंत्री योगी द्वारा जनपद भदोही में स्थानीय उद्यमियों तथा कारोबारियों को उत्पादों के विक्रय व प्रदर्शन की सुविधा मुहैया उपलब्ध कराने के लिए नवनिर्मित कारपेट बाजार का लोकार्पण किया गया। यह ‘स्वदेशी से स्वावलंबन’ के सिद्धांत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फार लोकल’ के भाव को चरितार्थ कर हर गांव-हर जिले को “विशिष्ट उद्यमिता क्षेत्र” के रूप में स्थापित कर रहा है।

गांव की पगडंडी पर आजीविका का उजियारा फैलाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में मनरेगा के माध्यम से 26.85 करोड़ से अधिक मानव दिवसों के सृजन का कीर्तिमान बनाया। एक दिन में 1.25 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर ‘हर हाथ को काम’ के संकल्प को फलीभूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाया गया।

आमजन को स्थानीय स्तर पर समुन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक रविवार “मुख्यमंत्री जनआरोग्य मेला” का आगाज भी साल 2020 में किया गया। इसके माध्यम से प्रदेश के 4200 से अधिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कैंप लगाकर समाज के अंतिम व्यक्ति को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्रदान करने की कोशिश की गई।

लगभग 32 लाख लोगों को लाभान्वित कर चुकी यह योजना कोरोना संक्रमण के कारण बाधित हुई थी किन्तु अब पुनः जनवरी 2021 से प्रारम्भ होने जा रही है। समग्रता में देखें तो कोरोना ‘काल’ में योगी आदित्यनाथ “राम काज किन्हें बिनु, मोहि कहां विश्राम” वाली शैली में काम करते दिखे। एक राजयोगी की कर्मठता और करुणा के सामने सुरसा की भांति मुंह बाए खड़ी चुनौतियां बेबस नजर आईं।

अब देखिए न, उत्तर प्रदेश गोवध निवारण(संशोधन) अध्यादेश, 2020 भी वर्ष 2020 में लागू हुआ। अनुचित माध्यमों द्वारा धर्म परिवर्तन पर लगाम लगाने के लिए उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश-2020 भी इसी साल वजूद में आया। निजी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले दंगाइयों, उपद्रवियों एवं बलवाइयों से वसूली हेतु ‘उत्तर प्रदेश रिकवरी ऑफ डैमेज टू पब्लिक एंड प्राइवेट प्रापर्टी अध्यादेश-2020’ जैसा ऐतिहासिक कानून आखिरकार महामारी वाले साल में ही लागू हो पाया।

इन सबके मध्य नारी शक्ति की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन की सुनिश्चितता पूरे वर्ष योगी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता में रही। मिशन शक्ति से लेकर मिशन रोजगार तक महिला सुरक्षा और महिला स्वावलंबन का लक्ष्य पूरित होते दिखा। उदाहरण के लिए कोरोना काल में परिषदीय विद्यालयों के बच्चों की यूनीफार्म सिलने का कार्य महिला स्वंय सहायता समूहों के द्वारा कराया गया।

67 हजार समूह सदस्यों द्वारा प्रदेश के स्कूली बच्चों के लिए 1 करोड़ 28 हजार स्कूल यूनीफार्म तैयार किए गए। समूहों व उनके माध्यम से जुड़ी महिलाओं को 100 करोड़ रुपए से अधिक की आमदनी हुई। यह एक उदाहरण मात्र है, ऐसे अनेक नवाचारी प्रयास योगी के मार्गदर्शन में किए जा रहे हैं। जैसे गावों में बैंकिंग सुविधाओं के प्रसार के लिए 58 हजार बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी नियुक्त करना एक अभिनव प्रयोग है।

गन्ना किसानों का रिकॉर्ड भुगतान हो या बंद चीनी मिलों को पुनर्जीवन या किसान नेता चौधरी चरण सिंह के गृह क्षेत्र में रमाला चीनी मिल के आधुनिकीकरण और विस्तारीकरण की दशकों पुरानी मांग, कोविड-19 का दुर्धर काल खंड भी उन्हें पूरा होने से रोक नहीं सका। योगी सरकार की कृषक उन्नयन के प्रति प्रतिबद्धता को इस बात से समझा जा सकता है।

“आस्था और अर्थव्यवस्था” दोनों के प्रति योगी आदित्यनाथ का समदर्शी भाव परिलक्षित होता है। उनकी नीतियों में दोनों भाव समानांतर गति करते हैं। जब कोरोना काल में अर्थव्यवस्था के लिए अनेक कार्य हुए तो भला आस्था कैसे छूट सकती थी!

‘गंगा यात्रा’ के माध्यम से आस्था और आर्थिकी दोनों के उद्देश्य पूरे हुए। इसके साथ ही श्रीरामजन्मभूमि पर सकल आस्था के केंद्र प्रभु श्री राम के भव्य-दिव्य मंदिर के निर्माण के शिलान्यास की सदियों पुरानी बहुप्रतीक्षित साध वर्ष 2020 में पूरी हुई।

यही नहीं ‘हर घर जल’ योजना के माध्यम से दशकों से प्यासे बंदेलखण्ड की प्यास के शमन हेतु पहल साल 2020 में प्रारम्भ हुई। यूपी में विश्वस्तरीय फिल्म सिटी विकसित करने के निर्णय का साक्षी भी यही वर्ष बना।

इसी वर्ष देश ने उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध की कमर टूटते हुए देखी। कल तक जिनके सामने कानून सजदा करता था, आज उनकी “लंका” भरभरा के जमींदोज हो रही है। एक अनुमान के अनुसार अपराधियों की लगभग ₹500 करोड़ से अधिक की संपत्तियां भी जब्त और कुर्क की जा चुकी हैं।

लिहाजा साल 2020 को चुनौतियों के साथ उपलब्धियों के लिए भी याद रखा जाएगा। इसने इंसानियत के दामन को आंसुओं के तर किया तो उम्मीदों की मशाल जलाकर आगे का रास्ता भी दिखाया है।

योगी के प्रयासों ने उत्तर प्रदेश के लिए साल 2021 के मंगलमय होने की बुनियाद रख दी है। ध्यान से सुनिए, वर्ष 2020 की आखिरी रात का दमकता हुआ चांद और आगत वर्ष 2021 के प्रथम अरुणोदय की युगलबंदी यह मंगल गीत सुना रही हैं।



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