सरकार के राहत पैकेज ने लोगों की ज़रूरतों का माखौल उड़ाया है: पी.चिदंबरम


राहत पैकेज को नाकाफी बताते हुए पूर्व वित्तमंत्री ने रविवार को कहा, ‘कुछ अर्थशास्त्रियों और मैंने पहले ही इस बात की रूपरेखा प्रस्तुत की थी कि गरीबों और वंचितों को नकदी व भोजन उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक पांच लाख करोड़ रुपये कैसे मिलेंगे। हमने गरीबों को कम से कम 90 फीसदी तक पैसा पहुंचाने के तरीकों का भी सुझाव दिया था, जिसमें निराश्रित भी शामिल थे।


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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने कोरोना वायरस के कारण देशभर में लॉकडाउन से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए केंद्र की ओर जारी वित्तीय सहायता पैकेज को जरूरत से काफी कम बताया है। उन्होंने केंद्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए अर्थशास्त्रियों ने संभावित लागत की राशि से अवगत कराया था तो भी सरकार ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई।

सरकार के राहत पैकेज ने लोगों की ज़रूरतों का माखौल उड़ाया 

राहत पैकेज को नाकाफी बताते हुए पूर्व वित्तमंत्री ने रविवार को कहा, ‘कुछ अर्थशास्त्रियों और मैंने पहले ही इस बात की रूपरेखा प्रस्तुत की थी कि गरीबों और वंचितों को नकदी व भोजन उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक पांच लाख करोड़ रुपये कैसे मिलेंगे। हमने गरीबों को कम से कम 90 फीसदी तक पैसा पहुंचाने के तरीकों का भी सुझाव दिया था, जिसमें निराश्रित भी शामिल थे। हालांकि सरकार ने सिर्फ डेढ़ लाख करोड़ रुपये आवंटित कर लोगों की जरूरतों का माखौल उड़ाया है।’

सड़कों पर त्रासदी के दृश्य के बाद भी सरकार को किस बात का इंतज़ार ? 

कांग्रेस नेता ने कहा कि आर्थिक सलाहकार परिषद मात्र 24 घंटे में ही गरीबों तक पैसा पहुंचाने के लिए संसाधनों और तरीकों का पता लगाने के लिए योजना तैयार कर सकती है लेकिन ऐसी कोई योजना लक्ष्य को प्राप्त करती हुई नहीं दिख रही। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सड़कों पर मौजूद त्रासदी का दृश्य सरकार को दिख ही रहा होगा, फिर भी जाने किस बात का इंतजार प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री को है। 

असहाय प्रवासियों और बच्चों को किसके भरोसे छोड़ दिया गया है ? 

उन्होंने पूछा कि क्या सरकार ने भूखे बच्चों और असहाय प्रवासी श्रमिकों को उनके भाग्य के भरोसे छोड़ दिया है। क्या सरकार अपने नागरिकों की मदद के लिए उचित और ठोस उपाय नहीं करेगी या फिर उसमें प्रशासनिक क्षमता का अभाव है।



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