राजस्थान: कहां लोप हुई कोटा की आयुध फैक्ट्री


डीसीएम उद्योग समूह की श्रीराम रेयन्स में ‘लाइट बुलेट प्रूफ व्हीकल’ तथा ‘अनमेंड एयर व्हील्स’ का निर्माण किया जाना था। कोई दो साल पहले रेयन्स को इन दोनों रक्षा उत्पादों का लाइसेंस मिल गया था। भारत के निजी क्षेत्र में लगने वाला रक्षा उत्पादों का यह पहला उद्योग था। लेकिन यह योजना अचानक कहां लापता हो गई।


भास्कर ऑनलाइन भास्कर ऑनलाइन
राज्य Updated On :

राजस्थान। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की खास योजना ‘मेक इन इंडिया’की कड़ी में शिक्षा नगरी कोटा को रक्षा उत्पादों के विनिर्माण का ‘मैन्यूफैक्चरिंग हब’ बनाना भी शामिल था। इस निर्माण पक्षधर योजना के तहत निजी क्षेत्र के डीसीएम उद्योग समूह की श्रीराम रेयन्स में ‘लाइट बुलेट प्रूफ व्हीकल’ तथा ‘अनमेंड एयर व्हील्स’ का निर्माण किया जाना था। कोई दो साल पहले रेयन्स को इन दोनों रक्षा उत्पादों का लाइसेंस मिल गया था। भारत के निजी क्षेत्र में लगने वाला रक्षा उत्पादों का यह पहला उद्योग था। लेकिन यह योजना अचानक कहां लापता हो गई। उद्योगपति और राजनेता दोनों ही इस पर मुंह खोलने को तैयार नहीं है।

बताते चलें कि दोनों ही रक्षा उत्पादों का डिजाइन उद्योग समूह ने स्वदेशी मॉडल के आधार पर तैयार किया था। इन उत्पादों का उपयोग सेना और अर्द्धसैनिक बलों के लिए होना था। ‘अनमेंड एयर व्हीकल’ एक बड़े ड्रोन के आकार का रक्षा उत्पाद होता है। इस आयुध का इस्तेमाल हल्के स्वचालित आग्नेयास्त्रों के विरुद्ध किया जाता है । इसकी मारक शक्ति 500 से 2000 किलोमीटर तक होती है। जबकि ‘लाइट बुलेट प्रूफ व्हीकल’ जटिल सामरिक परिस्थितियों में शत्रुओं पर मार करने वाला महत्वपूर्ण आयुध माना जाता है। सूत्रों की मानें तो उद्योग को 18 महीनों की अवधि में इस आयुध का सैम्पल रक्षा मंत्रालय को सौंपना था।

इस दृष्टि से रेयंस के संयत्र को त्रिस्तरीय रक्षकों के घेरे में ले लिया गया था। कोटा स्थित श्रीराम रेयंस के ग्यारह एकड़ परिसर में नई रक्षा इकाई की शुरूआत केन्द्र सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की शुरूआत थी। इस अभियान के तहत संयत्र में प्रति वर्ष 3000 और 500 नट का निर्माण किया जाना था। सूत्रों का कहना है कि यह रक्षा विनिर्माण इकाई कई छोटी-छोटी इकाईयों के लिए भी अवसर पैदा कर सकती थी। इससे उच्च तकनीक सेवाओं में बड़े पैमाने पर टिकाऊ रोजगार का सृजन भी हो सकता था। उद्यमियों का कहना है कि,‘इसकी स्थापना आज की परिस्थितियों में कोटा की अर्थव्यवस्था को डूबने से बचा सकती थी।

एक ताजा जानकारी के अनुसार केन्द्र सरकार द्वारा ‘आत्म निर्भर भारत’ अभियान के तहत करीब सौ रक्षा उत्पादों के आयात पर रोक लगाकर घरेलू रक्षा उद्योगों को प्रोत्साहित करने की है। विश्लेषकों का कहना है कि,कोटा में लगने वाली आयुध फैक्ट्री की योजना का पुर्नजीवित करने का इससे अच्छा कोई मौका नहीं हो सकता। डिफेंस एयरोस्पेस कमेटी के चेयरमैन एस पी शुक्ला की मानें तो देश में रक्षा आयुधों का उत्पादन होगा तो अन्य देश हमारी ताकत का अंदाजा नहीं लगा सकेंगे। लेकिन सवाल वही है कि सरकार इस विलुप्त हुई योजना को खोजने का प्रयास तो करे।

( विजय माथुर वरिष्ठ पत्रकार हैं और राजस्थान के कोटा में रहते हैं।)