शीशम के पेड़ों की अवैध कटाई के मामले की जांच पर रोक लगाने से हाई कोर्ट का इनकार

भाषा भाषा
दक्षिण भारत Updated On :

कोच्चि। केरल उच्च न्यायालय ने वायनाड जिले के एक आदिवासी बहुल गांव से करोड़ों रुपये के शीशम के पेड़ों की कथित अवैध कटाई और तस्करी के मामले में जांच पर रोक लगाने से इंकार कर दिया। राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जांच प्राथमिक स्तर पर है और अत्यंत प्रभावशाली लोगों की भूमिका संदेह के दायरे में है।

मामले में मुख्य आरोपी रोजो अगस्टीन तथा एंटो अगस्टीन ने मुत्तिल गांव में पेड़ों की अवैध कटाई के अनेक मामलों के सिलसिले में वन विभाग द्वारा दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध करते हुए याचिका दाखिल की थी।

अभियोजन महानिदेशक ने दलील दी कि गांव के अधिकारियों समेत सरकारी अधिकारियों के खिलाफ जांच चल रही है और अभी तक जो सामने आया है, वो तो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। उन्होंने दलील दी कि एक सरकारी आदेश की गलत व्याख्या करके पेड़ों की लूट की गयी।

अदालत ने सरकार के रुख पर विचार करने के बाद जांच पर रोक लगाने से मना कर दिया। इस बीच पेड़ों को जब्त करने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली एक अन्य याचिका पर विचार करते हुए उच्च न्यायालय ने पूछा कि पेड़ों की कटाई की अनुमति देने वाले अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गयी है।

अदालत ने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सतर्कता जांच शुरू करनी होगी। विपक्षी कांग्रेस नीत यूडीएफ ने मंगलवार को केरल विधानसभा में इस विषय को उठाया था।