बीएसएफ के हवलदार समेत पांच लोग माओवादियों को हथियार देने के आरोप में गिरफ्तार, जानें पूरा मामला

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झारखंड Updated On :

रांची। झारखंड के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए माओवादियों, विभिन्न नक्सली संगठनों, अपराधियों एवं राष्ट्रविरोधी ताकतों को हथियार और गोलाबारूद की आपूर्ति करने के आरोप में देश के विभिन्न हिस्सों से पांच लोगों को गिरफ्तार करने में सफलता पायी है। आरोपियों की निशानदेही पर अब तक 14 पिस्तौल, 21 मैगजीन, नौ हजार से अधिक गोलियां, मोबाइल फोन एवं अन्य सामग्री बरामद की गयी है।

झारखंड पुलिस के प्रवक्ता एवं पुलिस महानिरीक्षक (अभियान) अमोल विष्णुकान्त होमकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि इससे पूर्व 16 नवंबर को एटीएस ने केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 182वीं बटालियन के जवान अविनाश कुमार समेत तीन को भाकपा (माओवादियों) को हथियार और गोलाबारूद की आपूर्ति करने के आरोप में गिरफ्तार किया था और उनसे मिली जानकारियों के आधार पर कार्रवाई कर पुलिस आज इस नेटवर्क तक पहुंचने में कामयाब हुई। अविनाश जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में स्थित 182वीं बटालियन में पदस्थ था।

होमकर ने बताया कि एटीएस ने देशभर में उग्रवादी और आपराधिक संगठनों को हथियार की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क का खुलासा करते हुए आज कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि पंजाब में तैनात सीमा सुरक्षा बल का हवलदार हथियारों की आपूर्ति के इस पूरे नेटवर्क का सरगना था। उसकी निशानदेही पर 14 पिस्तौल, 21 मैगजीन और नौ हजार से ज्यादा कारतूस बरामद किए गए हैं।

अमोल विष्णुकान्त होमकर ने बताया कि राज्य में जितने भी उग्रवादी संगठन और आपराधिक गिरोह हैं, उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई के लिए और उनके हथियारों की आपूर्ति की श्रृंखला को तोड़ने के लिए कार्रवाई की जा रही है। जांच के दौरान कई अंतर-राज्यीय नेटवर्क उजागर हुए हैं।

उन्होंने बताया कि झारखंड एटीएस की टीम कई दिनों से झारखंड के अलावा पंजाब, राजस्थान, बंगाल, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में छापेमारी कर रही थी जिससे इस बड़े हथियारों की आपूर्ति के नेटवर्क का खुलासा किया जा सका। अधिकारी ने दावा किया कि यह गिरोह पूरे देश में उग्रवादी संगठनों के साथ-साथ बड़े-बड़े अपराधिक गिरोहों को हथियारों की आपूर्ति करता था।

होमकर ने बताया कि पंजाब में सीमा सुरक्षा बल की फिरोजपुर स्थित 116वीं बटालियन के हवलदार को इस नेटवर्क के सरगना के रूप में गिरफ्तार किया गया है। इस सिलसिले में सीमा सुरक्षा बल के एक सेवानिवृत्त जवान को भी गिरफ्तार किया गया है जिसे विभिन्न स्थानों और अपराधियों के बीच समन्वय का काम मिला हुआ था।

इससे पूर्व एटीएस के पुलिस अधीक्षक प्रशांत आनंद ने बताया कि माओवादियों को हथियारों की आपूर्तिकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद कई एजेंसियों को भी जानकारी दी जा रही है जिससे इस धंधे में लिप्त अन्य अपराधियों की भी गिरफ्तारी यथाशीघ्र की जा सके।

उन्होंने बताया कि गिरफ्तार अरुण कुमार सिंह, बीएसएफ की 116 वीं बटालियन का सेवानिवृत्त जवान है उसे बीएसएफ के जवानों को इस गिरोह से जोड़ने की जिम्मेदारी मिली थी। वहीं हवलदार कार्तिक बहरा 116 बीएसएफ बटालियन फिरोजपुर में कार्यरत था।

आनंद ने बताया कि इसके अलावा तीन अन्य लोगों की गिरफ्तारी महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले से की गयी है उनकी पहचान कुमार गुरलाल, शिवलाल धवन और हीरालाल कुमार के रूप में हुई है। ये तीनों मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाके में हथियारों की आपूर्ति का अवैध कारोबार करते थे।

होमकर ने बताया कि पिछले दस दिनों में इस रैकेट में शामिल अब तक कुल नौ अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है जिनमें तीन केन्द्रीय बलों से जुड़े हैं अथवा उसके कर्मी रह चुके हैं।