पंजाब में कृषि कानून के विरोध में 31 किसान संगठन हुए लामबंद, अनिश्चित कालीन ‘रेल रोको’ आंदोलन शुरू


किसानों का कहना है कि केन्द्र सरकार इन ‘‘काले कानूनों’’ के जरिए कुछ कॉरपोरेट हाउसों को ‘‘लाभ’’ पहुंचाना चाहती है। बीकेयू (दाकुंडा) के महासचिव जगमोहन सिंह ने कहा कि नए कानूनों के विरोध में किसानों के 31 संगठन 27 जगह पर धरना दे रहे हैं।


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चंडीगढ़। पंजाब में दिनोंदिन नये कृषि कानूनों का विरोध तेज होता जा रहा है। किसानों ने आज से पूरे पंजाब में ‘रेल रोको’ आंदोलन करने और भाजपा नेताओं के घरों के सामने धरना देना शुरू कर दिया है। किसानों ने बृहस्पतिवार से अनिश्चितकालीन ‘रेल रोको’ आंदोलन शुरू करते हुए आज राज्य में कई जगहों पर ट्रेन की पटरियों को अवरुद्ध कर दिया। इसके अलावा वे भाजपा के कई नेताओं के घरों के बाहर धरना भी दे रहे हैं।

इन कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन तेज करने के लिए 31 किसान संघ एकजुट हुए हैं और उन्होंने एक अक्टूबर से अनिश्चितकाल के लिए रेल रोको आंदोलन चलाने की घोषणा की है। भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहन) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने बृहस्पतिवार को कहा कि नये कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए केन्द्र पर दबाव बनाने के लक्ष्य से 31 किसान संघों के किसानों ने राज्य में कई जगहों पर ट्रेन की पटरियों को अनिश्चितकाल के लिए अवरूद्ध कर दिया है।

कोकरीकलां ने बताया कि उनके संघ ने ढाबलां (पटियाला), सुनाम (संगरुर), बुल्ढ़ाना (मानसा) और गिद्दरबाहा (मुक्तसर) में पटरियां अवरूद्ध की हैं। अन्य किसान संघों ने बरनाला, लुधियाना, भटिंडा और अन्य जगहों पर ट्रेनों का रास्ता अवरुद्ध किया है।

किसान मजदूर संघर्ष समिति के बैनर तले किसान 24 सितंबर से ही अमृतसर और फिरोजपुर में पटरियों पर बैठे हुए हैं। कोकरीकलां ने बताया कि किसान संगरुर, बरनाला, मोगा और गुरदासपुर में टोल प्लाजा पर धरना दे रहे हैं, वे कुछ कॉरपोरेट हाउसों के पेट्रोल पंपों और शॉपिंग मॉल के बाहर भी धरना दे रहे हैं।

किसानों ने राज्य में कुछ कॉरपोरेट हाउसों और उनकी बनायी चीजों का बहिष्कार करने का ऐलान किया है। किसानों का कहना है कि केन्द्र सरकार इन ‘‘काले कानूनों’’ के जरिए कुछ कॉरपोरेट हाउसों को ‘‘लाभ’’ पहुंचाना चाहती है। बीकेयू(दाकुंडा) के महासचिव जगमोहन सिंह ने कहा कि नए कानूनों के विरोध में किसानों के 31 संगठन 27 जगह पर धरना दे रहे हैं।