आखिर कैसा समाज चाहते हैं हम ?


युवती ने पिता के खिलाफ अपनी पसंद से अपने हमसफ़र का चुनाव किया वो भी भिन्न जाति में। यह बात पिता को इतनी नागवार गुजरी की उन्होंने ये घिनौनी हरकत करने से पहले एकबार सोच भी न सकें की वह किस हरकत को अंजाम दे रहे हैं।


बबली कुमारी बबली कुमारी
मत-विमत Updated On :

हमारा समाज इतना पीछे चल रहा है कि हमारी बेटियां उन्हें भागती हुई नज़र आती हैं अगर ऐसा कहें तो यह बिल्कुल भी अतिशयोक्ति नहीं होगी। खबर भोपाल की है जहाँ एक 25 साल की लड़की के पिता ने ही उसका बलात्कार किया। कारण जानेंगे तो आपको खुद को आधुनिक मानव कहने में शायद शर्म आ जायेगी और आप शायद सोचने पर भी मजबूर हो जाएं की आप 21वीं सदी में जी रहे है या नहीं। रविवार को भोपाल के पास समसगढ़ के जंगल में एक युवती और 8 महीने के बच्चे का शव मिलता है जिसके बाद खुलासे में पता चलता है कि युवती का बलात्कार के बाद हत्या कर दी गयी है और इस पूरी घटनाक्रम के पीछे कोई और नहीं युवती के पिता थे। इस पागलपन के पीछे यह कारण था की युवती ने पिता के खिलाफ अपनी पसंद से अपने हमसफ़र का चुनाव किया वो भी भिन्न जाति में। यह बात पिता को इतनी नागवार गुजरी की उन्होंने ये घिनौनी हरकत करने से पहले एकबार सोच भी न सकें की वह किस हरकत को अंजाम दे रहे हैं।

गला घोंटने से पहले उसने अपनी बेटी से कहा- तूने इसीलिए भागकर शादी की थी। तेरे कारण हम समाज में कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहे।

इसके बाद उसने 25 साल की बेटी से दुष्कर्म किया और गला दबाकर हत्या कर दी। आरोपी पिता बेटी को मृत पोते का शव दफनाने के बहाने जंगल में ले गया था। घटना दीपावली के दूसरे दिन की है। पुलिस ने आरोपी पिता और बेटे को गिरफ्तार कर लिया।

रातीबढ़ पुलिस को रविवार दोपहर समसगढ़ के जंगलों में एक महिला और बच्चे का शव पड़े होने की सूचना मिली थी। पुलिस ने हुलिए के आधार पर कुछ लोगों को शिनाख्त के लिए बुलाया। इसके बाद महिला की पहचान बिलकिसगंज निवासी 25 साल की युवती के रूप में हुई। टीआई सुधेश तिवारी ने बताया कि इसी आधार पर जब जांच की, तो इस मामले में पिता कमल ने हत्या करने की बात कबूल कर ली। पिता ने बताया कि वह खेती करता है। बेटी ने करीब एक साल पहले समाज से बाहर एक लड़के से लव मैरिज की थी।

पुलिस ने बताया की उसकी बेटी अपने पति के साथ रायपुर भाग गई थी। उसके बाद से ही उनकी समाज में बहुत बुराई हो रही थी। वह बेटी से बदला लेने की फिराक में था। दीपावली के दिन रातीबढ़ में रहने वाली बड़ी बेटी ने फोन पर बताया कि छोटी बहन अपने 8 महीने के बच्चे के साथ घर पर आई थी। उसके बेटे की मौत हो गई है। इसके बाद हम घर पहुंचे। मेरे साथ मेरा बेटा भी था। मैंने छोटी बेटी से कहा कि अब शव को रखने का कोई मतलब नहीं है। उसे हम दफना देते हैं। इसके बाद मैं बेटे के साथ बेटी और उसके बेटे को बाइक पर समसगढ़ के जंगल ले आए।

आरोपी कमल ने बताया कि उसने बेटे को सड़क पर खड़ा कर दिया। वह बेटी और पोते के शव को जंगल के अंदर एक नाले के पास ले गया। वह बहुत गुस्से में था। उसने बेटी से पूछा कि एक बार बता दे कि उसने भागकर शादी क्यों की। बेटी कुछ नहीं बोली। मैंने कहा- तूने इसी के लिए शादी की है… चल मैं भी तुझे यही देता हूं। रेप करने के बाद मैंने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। दोनों के शव नाले में फेंककर बेटे के साथ घर आ गया। घटना के बाद बड़ी बेटी को भी बता दिया था कि छोटी को मार दिया है।

आपको बता दें कि लव अफेयर-ऑनर किलिंग में यूपी सबसे आगे है। इस साल के NCRB के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, लव अफेयर में हत्या की सबसे अधिक घटनाएं उत्तर प्रदेश में हुई हैं। दूसरे नंबर पर बिहार और गुजरात हैं, जहां ऐसी 170-170 घटनाएं हुईं। 147 वारदातों के साथ तीसरे नंबर पर मध्य प्रदेश है।

यह महज एक खबर उनके लिए हो सकती है जो ऐसा विचार रखते हों या इस हरकत से किसी हद तक सहमत होंगे। लेकिन एक स्वस्थ समाज के लिए आज के दौर में जहाँ हम चाहते तो हैं की हमारी बेटियां हमारे घर का नाम रौशन करे, लड़कों से कंधा मिला के चले, नौकरी करे, घर संभाले, आर्थिक मदद करें, पैसा कमाएं, अपने पैरों पर खड़ी हो और न जाने क्या-क्या और चीख-चीख के कहते हैं की बेटी और बेटों में फर्क नहीं करते। हम प्रगतिशील हो गए हैं, हम आधुनिक विचार रखते हैं लेकिन जब बात शादी पर आती है तो फिर से लड़कियों को बताया जाता है कि वह इतनी अक्षम हैं कि उन्हें इस चुनाव का अधिकार मिले। आखिर क्यों ? एक लड़की इस चुनाव के लिए भले ही खुद को कितना भी जतन करे लेकिन वह समाज की नज़रों में कभी इस काबिल कभी नहीं होती। समाज एक लड़की को ब्याहति है सरकारी मुलाजिमों से, जमीनों से , दुकानों से , मकानों से ,बस ब्याही नहीं जाती तो सिर्फ और सिर्फ अपनी प्रेमियों से। कभी जाति के नाम पर तो कभी नाक और पगड़ी के नाम पर हर बार लड़की अपने परिवार के लिए अपनी खुशियों का गला घोटती आयी है और शायद घोटती रहेगी क्योंकि कीमत हरबार लड़कियों से वसूली गयी कभी यह कहकर की इतना पढ़ाया तुम्हें यह दिन देखने के लिए ? इतनी छूट दी तुम्हें यह दिन देखने के लिए ? कॉलेज भेजा तुम्हें और आज तुम हमारे मुँह पर कालिख पोत रही हो ? और इस तरह लड़कियों ने हमेशा अपने प्रेमियों का त्याग किया जिसके साथ वह ज़िन्दगी भर खिलखिलाती खुश रहती लेकिन माँ-बाप ने सुख ढूंढा जहाँ वह मकानों में है गाड़ियों में है लेकिन किसी भीड़ में गुम जहाँ वह कुछ चुनती नहीं है उनका चुनाव करते हैं उनके  पिता  फिर  पति और फिर बेटे बस नाम और रिश्ते बदलते चले जाते हैं लेकिन उन्हें चुनाव का अधिकार नहीं मिलता, प्यार करने की इजाजत नहीं मिलती, अपनी शर्तों पर ज़िन्दगी नहीं मिलती, अपनी खुशी चुनने का हक़ नही मिलता, मिलता है तो बस समाज और उसका बंधन जिसमें वो ज़िन्दगी भर घुट-घुट कर जीती है और जनमती है एक पिता, बेटा, बाप और एक शोषक को।

यह घटना पहली बार नहीं घटी है या जो मैं कह रही हूँ ऐसा नहीं है की ये बात पहली बार कही गयी है यह बात इतनी बार बोली गयी है दोहराई गयी है की इन बातों में भी एक हल्कापन महसूस किया जा सकता है और फिर जब हम ऐसी खबरें पढ़ते हैं तो हमें कुछ अलग नहीं लगता सब नार्मल लगता है यही तो होता आया है लडकियां भागती हैं पिता और भाई कभी गोली से मार देते हैं तो कभी पेड़ों से लटका देते हैं। और देते हैं समाज की दुहाई की नाक कट जाती समाज में। बेटी शादी के बाद मार खाती है तब नाक नहीं कटती ? जब दहेज़ के लिए रोज ससुराल में खरी खोटी सुनती है तब नाक नहीं कटती ? जब रोज रोती है तब समाज क्यों नहीं आता आँसू पोछने ? ऐसे ढेरों सवाल कौंधते हैं हमारे जेहन में लेकिन जवाब है सिर्फ समाज में नाक कट जाएगी। आखिर कौन है ये समाज हम आप ही न ? या कोई और भी है ? सोचियेगा।

क्या इसी समाज की कल्पना की थी हमनें, हमारे नीति निर्माताओं ने, क्या इसी आज़ादी की प्रस्तावना लिखी गयी थी और भरोसा दिलाया गया था समान अधिकार से और सम्मान के साथ जीने का।