आज आया ब्रुनो का नंबर, निर्बल श्यामा शेरनी बनी हुंकार रही थी…


नौकुचियाताल में मेरे घर के सामने हरा भरा खेत है। काफी बड़ा। इसमें आम और घास के तमाम पेड़ हैं। जो लोग पहाड़ से रिश्ता रखते हैं। वे जानते हैं यहां घास के बड़े पेड़ ही होते हैं। पेड़ों में सुबह पांच बजे से तरह तरह की सुन्दर चिड़िया मधुर कलरव करती हैं।


वीरेंद्र सेंगर
मत-विमत Updated On :

अरे, आज सुबह परिदृश्य पूरा बदल गया। निर्बल श्यामा शेरनी बनी हुंकार रही थी। शेर सी काया वाला ब्रुनो पूछ दबाकर पिछे हट गया। दुबली श्यामा हुंकार लगाकर ललकार रही थी। निरीह गाय माता का नया तेवर देखकर, ब्रुनो की मालकिन ज्योति भी हंसने लगी। रोज सुबह श्यामा को बेवजह दौड़ाने वाला ब्रुनो उल्टा फंस गया था। इसके बाद भी ब्रुनो की मालकिन ब्रुनो की इशारों से हंसी बनाती रहीं।

एक तो इतनी खुले आम अपमान। ऊपर से अपनी ही मालकिन की ये अदा। ब्रुनो को गुस्सा आ गया। उसने ज्योति पर जोर जोर से भौंक भौंक शुरू की। ब्रुनो इस बेइज्जती से शर्मसार। आखिर उसने मैदान छोड़ दिया। लेकिन गाय माता का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उसने पैर से जमीन खोदना जारी रखा।

पास से तमाशा देख रहे दोनों गली वाले कुत्ते पास आए। उन्होंने श्यामा को सलाम सा देना शुरू किया। गुस्सा भाग गया। दस मिनट तक दोस्ताना खेल चलता रहा।मैं बहुत भावुक होने लगा।

दरअसल, नौकुचियाताल में मेरे घर के सामने हरा भरा खेत है। काफी बड़ा। इसमें आम और घास के तमाम पेड़ हैं। जो लोग पहाड़ से रिश्ता रखते हैं। वे जानते हैं यहां घास के बड़े पेड़ ही होते हैं। पेड़ों में सुबह पांच बजे से तरह तरह की सुन्दर चिड़िया मधुर कलरव करती हैं। कुछ तो इतनी मस्त हो जाती हैं की मेरी खोपड़ी के ठीक ऊपर से उड़ान भर देती हैं। आज तो एक शरारती चिड़िया ने मेरी गंजी खोपड़ी को प्लेटफॉर्म सा मान लिया। बैठ गई। मैं आनंद में डूब गया।चिड़िया रानी फुर्र। सामने झील का निर्मल पानी। दूर दूर तक। कुत्ते भी भौंक कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

अरे, ब्रुनो और श्यामा की बात तो रह ही गई। सुबह मेरी पड़ोसन ज्योति अपने ब्रुनो के साथ टहलती हैं। ब्रुनो घास खाने आयी गाय पर गुर्राते हुए दौड़ता है। कई बार वह बेदम हो जाती। फिरभी ब्रुनो मानता नहीं कुत्ता कहीं का।

करीब एक सप्ताह से ये देख रहा था। तीन दिन से गली वाले अनाम कुत्तों ने श्यामा के साथ खेला शुरू किया। एक ने श्यामा का कान दबोचा। इस पर श्यामा गुस्साई। कुत्ते ने पूछ पकड़ कर खिंचा। श्यामा गुस्से मे आयी। कुत्ते मार्शल ट्रेनिंग सी देते रहे। जैसे आत्म निर्भर बना रहे हों। आज तो श्यामा ने कमाल ही दिखा दिया। हारा हुआ ब्रुनो अपनी छत से भौंकता रहा। ब्रुनो की मालकिन उसे रोज एक पाव पनीर खिलाती हैं। बदले में वो पूछ हिलाता है और श्यामा सूखी घास खाकर मस्त है ।अपने दो नए दोस्तों के साथ।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और दिल्ली में रहते हैं।)