सवाल सिर्फ राहुल ने नहीं, सवाल भाजपा सांसद तापिर गाव ने भी उठाए हैं


विपक्ष से पहले चीन की घुसपैठ को लेकर अरूणाचल प्रदेश से भाजपा सांसद तापिर गाव ने केंद्र सरकार को चेताया था। तापिर गाव आज भी विपक्ष के दावे पर मुहर लगाते हुए कह रहे हैं कि चीन अरूणाचल प्रदेश में कई किलोमीटर अंदर तक घुसपैठ कर गया है। तापिर गाव ने ये दावा राहुल गांधी और सोनिया गांधी दवारा सरकार से पूछे गए सवालों के बाद भी किया है।


संजीव पांडेय संजीव पांडेय
मत-विमत Updated On :

चीन की घुसपैठ पर पूछे गए सवालों को लेकर सता पक्ष विपक्षी कांग्रेस पर हमलावर हो गया है। लेकिन सवाल यह है कि जो कुछ विपक्ष बोल रहा है वही भाजपा के सांसद तापिर गाव भी बोल रहे है। लेकिन सरकार और भाजपा कांग्रेस पर हमलावर है। कांग्रेस पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से सांठगांठ करने का आरोप लगा है। कांग्रेस पर चीन से दान लेने का आरोप भी लग गया है। तो क्या सरकार से वाजिब सवाल पूछने वाले की मंशा पर ही सवाल खड़ा किया जाएगा? 

लद्दाख इलाके में चीन की घुसपैठ को लेकर राहुल गांधी और सोनिया गांधी के पूछे गए सवाल से भाजपा असहज है। लेकिन सवाल पूछना तो विपक्ष का धर्म है। अगर सबकुछ ठीक है तो सरकार को सीमा की स्थिति की सच्चाई बताने में क्या परेशानी है? सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष राजनीति कर रहा है। लेकिन अगर आज विपक्षी दल कांग्रेस राजनीति कर रही है तो यही कुछ तो भाजपा ने मनमोहन सिंह के कार्यकाल में किया था। 

मनमोहन सिंह के कार्यकाल में जब सीमा पर चीन की घुसपैठ की खबरें आयी थी, तो तमाम सवाल भाजपा ने बतौर विपक्षी दल यूपीए सरकार से पूछे थे। सवाल यही है कि यूपीए कार्यकाल के दौरान चीन की घुसपैठ को लेकर सवाल पूछने वाली भाजपा उस समय राष्ट्रवादी थी? आज चीन की घुसपैठ से संबंधित लगभग वही सवाल पूछे जाने पर कांग्रेस राष्ट्रद्रोही है?

विपक्ष ने सत्ता पक्ष से सवाल तब पूछा जब लद्दाख में चीन सीमा पर भारत के 20 सैनिक शहीद हुए। अखबारों में खबरें आयी कि चीन गलवान घाटी और पैंगोंग झील के भारतीय इलाके में काफी अंदर तक घुसपैठ कर चुका है। जब ये खबरें आयी तो विपक्ष ने सवाल उठाना शुरू कर दिया है। लेकिन सत्ता पक्ष ने स्थिति स्पष्ट करने के बजाए विपक्ष पर ही सवाल खड़े कर दिए। लेकिन अब वस्तुस्थिति देखे। 

विपक्ष से पहले चीन की घुसपैठ को लेकर अरूणाचल प्रदेश से भाजपा सांसद तापिर गाव ने केंद्र सरकार को चेताया था। तापिर गाव आज भी विपक्ष के दावे पर मुहर लगाते हुए कह रहे हैं कि चीन अरूणाचल प्रदेश में कई किलोमीटर अंदर तक घुसपैठ कर गया है। तापिर गाव ने ये दावा राहुल गांधी और सोनिया गांधी दवारा सरकार से पूछे गए सवालों के बाद भी किया है।

तापिर गाव ने 19 नवंबर 2019 को संसद में शून्यकाल के दौरान सरकार को आगाह किया था कि चीन अरूणाचल प्रदेश में घुसपैठ कर चुका है। संसद में अरूणाचल प्रदेश में चीन की घुसपैठ का मुद्दा उठाते हुए तापिर गाव ने कहा था कि अरूणाचल से जुड़े मुद्दों को मीडिया में तरजीह नहीं दी जाती है। सरकार भी अरूणाचल से जुड़े मुद्दे को नजर अंदाज करती है। उन्होंने कहा अगला डोकलाम अरूणाचल प्रदेश में होगा।

तापिर गाव ने संसद में बताया कि चीन ने अरूणाचल प्रदेश में 50 से 60 किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया चीनी घुसपैठ को गंभीरता से लिया जाए। तापिर गाव ने संसद में कहा कि 14 नवंबर 2019 को राजनाथ सिंह अरूणाचल प्रदेश के तवांग में आए। यहां उन्होंने एक पुल का उदघाटन किया। इस पर चीनी अधिकारियों ने प्रेस कांफ्रेंस कर आपति जतायी। जब राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री अरूणाचल गए तब भी चीन ने आपति जतायी

इससे पहले सितंबर 2019 में तापिर गाव ने चीन की घुसपैठ का खुलासा करते हुए कहा था कि चीन ने भारतीय सीमा में 75 किलोमीटर अंदर आकर एक लकड़ी का पुल बनाया है। पुल अंजाव जिले में चागलगाम के पास बनाया गया है। अब तापिर गाव ने 25 जून 2020 को ‘स्क्रॉल’ से बातचीत करते हुए कहा कि चीन ने भारत से लगते हुए सभी रणनीतिक मोर्चे पर घुसपैठ की है।

तापिर गाव ने दावा किया कि ऊऊपरी सुबनसिरी डिवीजन के
असाफिला, दिबांग घाटी के आंद्रेला, और अंजाव जिले के चागलगाम इलाके में चीनी सेना की घुसपैठ हुई है। यहां चीन
की सेना अंदर तक आ रही है। तापिर गाव ने दावा किया इसी साल अप्रैल महीनें में चीनी
सेना ने असाफिला इलाके में जड़ी बूटी ढूंढ रहे कुछ स्थानीय लोगों को पकड़ लिया था।
बाद में भारतीय सेना की दखल के बाद उन्हें छोड़ा गया। अगर भारतीय सीमा में चीनी
सेना नहीं आए तो स्थानीय लोगों को चीनी सेना ने कैसे पकड़ा?

सच्चाई तो यही है कि भारत सरकार विपक्ष के साथ
राष्ट्रीय मुद्दों पर सहमति बनाने में विफल रही है। इसका एक कारण सरकार और विपक्ष
के बीच तालमेल का आभाव होना है। कुछ राज्यों में विपक्ष की सरकारों को अस्थिर करने
की सत्ता पक्ष की योजना ने विपक्ष और सता पक्ष के बीच कड़वाहट को और बढ़ा दिया है।
हालात यह है कि सीमा पर तनाव के दौरान कांग्रेस और भाजपा आपस में भीड़ी हुई है।
दोनों पार्टियां एक दूसरों को राष्ट्र विरोधी साबित करने में लगी हुई है।
राहुल गांधी के सवालों से परेशान भाजपा कांग्रेस और
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच सांठगांठ बता रही है। कांग्रेस और चीनी
कम्युनिस्ट पार्टी के बीच लेनदेन तक का आरोप लगायी जा रही है। उधर विपक्षी
कांग्रेस भाजपा पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से संबंध रखने का आरोप लगा रही है।
चीन के कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के साथ भाजपा के नेताओं के फोटो को सोशल
मीडिया पर जारी किया जा रहा है। ये आरोप-प्रत्यारोप भारत के राजनीतिक दलों की समझ
पर सवाल उठाते है। संदेश तो यही जा रहा है कि भारत के नेता राष्ट्रहित के बजाए
निजी हित को प्राथमिकता देते है। जबकि लोकतांत्रिक सरकार का राजधर्म यही है कि
विपक्ष दवारा राष्ट्रहित में उठाए गए सवाल का उचित जवाब दे।

अगर पिछले 30 सालों की चीन कूटनीति की समीक्षा होगी तो सारे बेनकाब होंगे। क्या भाजपा की सरकार और क्या कांग्रेस की सरकार, चीन की कूटनीति पर दोनों संदेह के घेरे में आएंगे। क्योंकि सच्चाई तो कागजों में उपलब्ध है। अगर पंडित जवाहर लाल नेहरू की चीन कूटनीति पर सवाल उठता है, तो सवाल अटल बिहारी वाजपेयी की चीन कूटनीति भी उठता है। क्योंकि बतौर प्रधानमंत्री वाजपेयी ने 2003 में चीन के अधीन तिब्बत स्वाययत क्षेत्र को मान्यता दी थी।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कूटनीति चीन के सामने कमजोर साबित हुए। यह सच्चाई है। लेकिन चीन कूटनीति में बदलाव नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भी नजर नहीं आया है। स्थिति आज भी वही है जो मनमोहन सिंह के कार्यकाल में थी। नरेंद्र मोदी सरकार की कूटनीति चीन के सामने विफल रही है। कई बार मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बैठक हुई। शिखऱ बैठकें भी हुई। लेकिन मोदी युग में  भी भारतीय सीमा के अंदर चीन की घुसपैठ में कमी नहीं आयी है।