केएन गोविंदाचार्य का मोदी सरकार को तीन सुझाव, जिससे खुशहाल हो सकते हैं किसान


देश भर में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) गारण्टी कानून बनाने की मांग को लेकर किसान सड़कों पर हैं। राजधानी दिल्ली के हर बार्डर पर पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान विगत एक सप्ताह से धरना दे रहे हैं। किसान नेताओं और केंद्र सरकार के बीच कई बार बातचीत का दौर चला, लेकिन हर बार यह बेनतीजा रहा। ऐसे में भाजपा के पूर्व महासचिव एवं राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के प्रणेता गोविंदाचार्य ने न्यूनतम गारण्टी कानून लागू करने के अलावा और क्या करे सरकार -का सुझाव दिया है।


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केएन गोविंदाचार्य
नई दिल्ली। केंद्र सरकार हर वर्ष 23 कृषि उपजों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (#MSP) की घोषणा करती है। घोषित समर्थन मूल्य पर खरीद की सरकारी मंडी (#APMC Market Yard) की व्यवस्था केवल 4-5 राज्यों में है और वह भी प्रमुख रूप से धान और गेहूँ की खरीद के लिए। इन बातों का परिणाम है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ केवल 6 प्रतिशत किसानों को ही मिलता है। अन्य सभी किसान अपनी उपज को बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर बेचने के लिए मजबूर हैं।

कृषि अर्थशास्त्रियों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य न मिलने के कारण 2000 से 2016 के बीच भारतीय किसानों को 45 लाख करोड़ रुपये का घाटा हुआ। अर्थात हर वर्ष किसानों के 3 लाख करोड़ रुपये दूसरों की जेब में चले गए। चूंकि 2016 से न्यूनतम समर्थन मूल्य पहले की अपेक्षा न्यूनतम ही बढ़े हैं, इसलिए उसके बाद किसानों का घाटा और बढ़ा होगा। इसीलिए आज किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य का गारण्टी कानून की मांग के लिए सड़कों पर आंदोलन कर रहा है।

अब आगे प्रश्न आता है कि क्या न्यूनतम समर्थन मूल्य गारण्टी कानून बनाने से सभी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलने लग जाएंगे? उत्तर है कि सभी किसानों की भलाई के लिए उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलें, इसके लिए सरकार को कुछ और काम भी तत्काल करने चाहिए। यहां सरकार द्वारा किये जा सकने वाले कुछ कार्यों को उदाहरण के रूप में रख रहें हैं।

एक: अभी सरकार 23 कृषि उपजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है। उसमें आलू और प्याज को शामिल कर लेना चाहिए। हर 2-3 वर्ष बाद आलू और प्याज के किसानों पर संकट आता रहता है। कभी उनकी उपज इतनी बढ़ जाती है कि उन्हें बाजार में लागत मूल्य भी नहीं मिलते। इसलिए आलू और प्याज उगाने वाले लाखों किसानों को राहत देने का यह सबसे सरल तरीका है।

दो: डिजिटल इंडिया का लाभ सबसे पहले किसानों को मिलने की व्यवस्था केंद्र सरकार करे। जैसे ही किसान की उपज का सौदा हो, और उसके उपज की पर्ची बने और उसी क्षण व्यापारी के बैंक खाते से किसान के बैंक खाते में पैसे पहुंच जाएं। गन्ने के किसान और कपास के किसानों को इसका सबसे अधिक लाभ होगा। अब सब किसानों के बैंक खाते केंद्र सरकार ने बना ही दिए हैं, सभी मंडियों में इंटरनेट पहुंच ही गया है। इसलिए अब डिजिटल इंडिया का लाभ किसानों को तुरंत मिलने की व्यवस्था हो।

तीन : अभी अधिसंख्य सरकारी मंडियां केवल पंजाब, हरयाणा सहित 4-5 राज्यों में ही हैं। सरकार देश के प्रत्येक विकास प्रखंड (Development Block) में कम से कम एक कृषि उपज बाजार समिति मंडी (#APMC Market Yard) की स्थापना अवश्य करे। ताकि अगर किसानों को किसी कारण से निजी बाजार में अपनी उपज बेचने में कठिनाई हो तो उसके पास सरकारी मंडी का विकल्प उपलब्ध रहे।

यहां वर्तमान में हो रही विविध कॄषि उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य अधिकाधिक किसानों को कैसे मिले, इस पर विचार रखा है। उपज बढ़ाने, अन्य लाभदायी उपजें कौन सी हैं, किसानों और देश के हित में अधिक लाभदायी कौन सी उपजें हैं, आदि अन्य विषय भी हैं। भारत विविधतापूर्ण देश भी है और विशाल देश भी। इसलिए हर जिले और हर प्रान्त के किसानों की समस्याओं के अलग अलग समाधान भी होंगे। न्यूनतम समर्थन मूल्य गारण्टी कानून के साथ उपरोक्त तीन कार्यों को अगर सरकार करती है, तो पूरे देश के किसानों का शोषण बहुत हद तक रुक जाएगा।

केंद्र सरकार और राज्य सरकारें इन कार्यों पर ध्यान देकर किसानों के कष्टों को दूर करने का प्रयत्न करेंगी, ऐसी मुझे पूरी आशा है।

(के.एन. गोविंदाचार्य संघ विचारक एवं भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव हैं।)