न्याय, बदला, बीएसपी, बाबा साहब और सतीश चंद्र मिश्र


आखिर बदला किनसे लिया जाएगा – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से, पूर्व मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडे, वर्तमान मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी और अपर मुख्य सचिव (कानून) अवनीश अवस्थी से बदला लिया जाएगा। क्या सतीश चंद्र मिश्र इन सभी को मारने की धमकी दे रहे हैं? या इन सभी को जेल में डालने का वादा कर रहे हैं?


समरेंद्र सिंह
मत-विमत Updated On :

न्याय और बदला दो अलग शब्द हैं। इनके अर्थ एकदम अलग हैं। जब आप बदला लीजिएगा तो अन्याय कीजिएगा। जब आप न्याय करने जाइएगा तो बदला नहीं ले पाइएगा। और बदला कभी पूरा नहीं होता। मसलन जब फूलन देवी ने बदला लिया था (जो कि उन्हें पूरा हक था) तब भी उसमें उनसे अन्याय हुआ था। एक छोटा बच्चा भी मारा गया था। कुछ ऐसे लोग मारे गए थे जो उनके साथ हुए अन्याय के हिस्सेदार नहीं थे। फूलन देवी का बदला तो पूरा हुआ, लेकिन अन्याय पीछे रह गया। फूलन देवी ने अपने हिस्से की सजा भोगी और सांसद बनीं। पर बदले का सिलसिला यहां नहीं खत्म हुआ।

फिर शेर सिंह राणा ने अगला बदला लिया। वह हिंसक और जातिवादी सोच का एक विकृत और बीमार व्यक्ति था। उसने घात लगा कर संसद के करीब फूलन देवी की हत्या की। उत्तराखंड के शेर सिंह राणा का कानपुर देहात के लोगों से कोई सीधा रिश्ता नहीं था। पर बीमार सोच जाति और धर्म की भावना से ऊपर उठने कहां देती है।

अब फूलन देवी के कत्ल का बदला अधूरा है। मान लीजिए कि उनकी जाति से किसी शख्स की सोच शेर सिंह राणा की तरह ही विकृत हुई और उसने बंदूक लेकर बदले की ठानी और फिर कुछ लोगों को जोड़ कर ठाकुरों के किसी गांव पर हमला करके अनेक लोग कत्ल कर दिए जाएं तो क्या होगा? जो लोग शेर सिंह राणा की घृणित हरकत को जायज ठहराते हैं- वो लोग फूलन देवी की जाति से ताल्लुक रखने वाले लोगों को ऐसा करने का अधिकार देंगे? क्या जो लोग शेर सिंह राणा द्वारा फूलन देवी की हत्या को न्याय मानते हैं- क्या वो लोग फूलन देवी के चाहने वालों की हरकत को न्याय मानेंगे?

इसलिए बहुजन समाज पार्टी के सतीश चंद्र मिश्र को यह साफ करना चाहिए कि राम की नगरी अयोध्या में जब वो जय परशुराम का उद्घोषक कर रहे थे और बदले की बात कह रहे थे तो क्या वो परशुराम की तरह सभी ठाकुरों और उनके बच्चों को कत्ल करना चाहते हैं? यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि उनके बदले के केंद्र में एक व्यक्ति है, एक जाति है या फिर कई व्यक्ति और कई जातियां हैं? क्योंकि एनकाउंटर तो कोई मुख्यमंत्री नहीं करता है। एनकाउंटर तो सिपहसालार करते हैं और कराते हैं। तो क्या बीएसपी की सत्ता आने के बाद सतीश चंद्र मिश्र की अगुवाई में सारे ब्राह्मण किसी एक व्यक्ति को मारेंगे या फिर किल बिल की तरह सभी को चुन-चुन कर मारेंगे?

एक सवाल ये भी कि क्या सतीश चंद्र मिश्र खुद गोली चलाएंगे या नहीं? या गोली चलाने के लिए उन्हीं हाथों और कंधों का सहारा लेंगे जो इस समय गोली चला रहे हैं? या विकास दुबे जैसे हत्यारों की मदद ली जाएगी? मसलन पूर्व मुख्य सचिव पांडे, वर्तमान मुख्य सचिव तिवारी, वर्तमान अपर मुख्य सचिव अवस्थी, पूर्व डीजीपी अवस्थी, वर्तमान डीजीपी गोयल- ये सब भी बदले के दायरे में रहेंगे या नहीं रहेंगे? सतीश चंद्र मिश्र उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज ब्राह्मणों को भी सजा देंगे या नहीं देंगे? कहीं ऐसा तो नहीं कि ब्राह्मणों के सवाल पर मिश्र ये कहेंगे कि ब्राह्मण तो पूज्य होता है, वो गुनाह कर ही नहीं सकता, उसका हर गुनाह आशीर्वाद की तरह समझा जाना चाहिए?

ये सवाल ऐसे ही उठा रहा हूं क्योंकि आने वाला समय बहुत भयावह होने जा रहा है। जब सिस्टम के जरिए घोषित तौर पर बदला लेने का उपक्रम चलाया जाएगा तो न जाने कितने लोग मारे जाएंगे और यह सब कुछ होगा बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नाम पर। न्याय के पुरोधा और संविधान के रचयिता के नाम पर- सत्ता का लोभी एक बूढ़ा ब्राह्मण नरसंहार की तैयारी कर रहा है! आप सब सावधान रहिएगा।

सतीश चंद्र मिश्र को ये साफ करना चाहिए कि वो किनसे और कैसे बदला लेंगे?

बसपा ने सपा से बढ़त बना ली है। सतीश चंद्र मिश्र ने कहा है कि बसपा ने 40 पंडितों को सांसद बनाया। उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा की सीटें हैं उस हिसाब से विधानसभा की 403 में 200-250 सीटों पर बीएसपी पंडित लड़ाएगी। अगर राज्य सभा की 31 सीटें जोड़ ली जाएं तो भी बसपा कम से कम विधानसभा की 150-200 सीटों पर पंडित लड़ाएगी। उसके बाद जीत होगी और पंडित अपराधियों के एनकाउंटर का बदला लिया जाएगा।

आखिर बदला किनसे लिया जाएगा – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से, पूर्व मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडे, वर्तमान मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी और अपर मुख्य सचिव (कानून) अवनीश अवस्थी से बदला लिया जाएगा। क्या सतीश चंद्र मिश्र इन सभी को मारने की धमकी दे रहे हैं? या इन सभी को जेल में डालने का वादा कर रहे हैं? सतीश चंद्र मिश्र को बदला लेने के तरीके पर भी थोड़ी रोशनी डालनी चाहिए।

अपराधियों के पक्ष में इतनी मजबूती से कोई ब्राह्मण नेता ही खड़ा हो सकता है। किसी दूसरी जाति में अभी तक इतनी बेशर्मी और साहस उत्पन्न नहीं हुआ है। खैर सपा को भी कुछ करना चाहिए। मुसलमानों के एनकाउंटर का सवाल उठा सकते हैं। वो उनका और यादवों के एनकाउंटर का बदला ले लें। आखिर कुछ तो करें!

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, लेख में व्यक्त विचार निजी हैं।)