योगी की नाक के नीचे धर्मांतरण का धंधा


प्रदेश में चल रहे ऐसे घिनौने कार्य का पता चलता है जो किसी भी सभ्य समाज के लिए अभिशाप है।


संजय तिवारी
मत-विमत Updated On :

2 जून की शाम दिल्ली से सटे डासना मंदिर के महंत से मिलने के लिए दो लोग पहुंचते हैं। इनमें से एक अपना नाम काशी गुप्ता बताता है और दूसरा डॉ विपुल विजयवर्गीय। दोनों बताते हैं कि वो महंत यति नरसिंहानंद से शास्त्रार्थ करने आये हैं। रात में कोई शास्त्रार्थ करने क्यों आयेगा? ये सोचकर उनसे पूछताछ शुरु होती है। पूछताछ में शक होता है तो उनके सामान की जांच होती है। सामान में दो सर्जिकल चाकू मिलती है।

अब तो वहां बवाल मच जाता है। पूछताछ में पता चलता है कि दोनों ने अपना नाम गलत बताया है। काशी गुप्ता का नाम कासिफ है और विपुल विजयवर्गीय भी धर्मांतरण करके रमजान बन चुका है। उन दोनों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया जाता है। पुलिस जांच पड़ताल में जुटती है तो इनके उस्ताद सलीमुद्दीन का नाम सामने आता है जो गाजियाबाद में ही रहता है, और विपुल विजयवर्गीय का धर्मांतरण करवानेवाला है। सलीमुद्दीन को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ होती है तो प्रदेश में चल रहे ऐसे घिनौने कार्य का पता चलता है जो किसी भी सभ्य समाज के लिए अभिशॉप है। पुलिस को पता ये चलता है कि प्रदेश में बड़े स्तर पर धर्मांतरण का खेल चल रहा है।

आगे की जांच पुलिस की बजाय एटीएस को दे दी जाती है क्योंकि यति नरसिंहानंद के एक बयान के कारण वो मुसलमानों के निशाने पर आ चुके हैं। दिल्ली से एक कश्मीरी मुसलमान की गिरफ्तारी भी हो चुकी थी जो पुजारी के वेश में नरसिंहानंद को मारने की तैयारी कर रहा था। निश्चय ही पुलिस को इसमें आतंकवाद का कोण दिखा जिसके बाद जांच को एन्टी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) के हवाले कर दिया गया। एटीएस ने जब जांच पड़ताल शुरु की तो पता चला कि इस गिरोह से जुड़े लोग लड़कियों, गरीब लोगों यहां तक कि मूक बधिर बच्चों तक का धर्मांतरण करवाते थे। एटीएस को आशंका है कि इन मूक बधिर बच्चों का माइंडवाश करके इनका इस्तेमाल मानव बम के रूप में भी किया जा सकता था।

मूक बधिर बच्चों को इस्लाम कबूल करवाने की जांच आगे बढी तो उसके हाथ मोहम्मद उमर गौतम तक पहुंचे। मोहम्मद उमर गौतम मूलत: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर का रहनेवाला है और स्वयं एक धर्मांतरित मुसलमान है। उमर गौतम का मूल नाम श्याम सिंह गौतम है और 35 साल पहले एक मुस्लिम मित्र के प्रभाव में आकर इस्लाम कबूल कर लिया था। इस्लाम कबूल करने के बाद वह स्वयं लोगों को इस्लाम कबूल करवाने लगा। शुरुआत में तो उसके घर में विरोध हुआ लेकिन वह इस्लाम के प्रति इतना कट्टर हो गया था कि उसने मां बाप, भाई बहन, पत्नी बच्चे सबको छोड़ दिया। जब किसी के समझाने का उसके ऊपर कोई असर न हुआ तो चार साल बाद उसकी पत्नी राजेश्वरी उसके साथ रहने दिल्ली चली आयी जहां उमर गौतम ने अपनी पत्नी का भी धर्म बदल दिया और वह राजेश्वरी से रजिया बन गयी।

इसके बाद भी उमर गौतम पूरी तरह से कन्वर्जन के काम में शामिल हो गया। दिल्ली के ओखला में उसने एक इस्लामिक दवा सेन्टर खोल लिया। देश प्रदेश में घूम घूमकर लोगों का धर्मांतरण करवाने लगा। श्याम सिंह गौतम उर्फ उमर का दावा है कि अब तक वह दो हजार लोगों को इस्लाम कबूल करवा चुका है। इसमें महिलाएं, नौजवान लड़कियां, गरीब परिवार के लोग और वो मूक बधिक बच्चे भी शामिल है जो नोएडा की डेफ सोसायटी में पढते थे।

पुलिस और जांच एजंसियां इस जांच में जुटी है कि लोगों को धर्मांतरित करने के लिए वह लोगों को क्या लालच देता था? क्या इसके लिए उसे विदेश से पैसा भी मिलता था? लेकिन जो अपने कुछ विडियो में उमर स्वयं स्वीकार करता है वह यह कि वह लोगों को जन्नत और जहन्नुम का डर दिखाया था और लोगों को इस्लाम की ओर लेकर आता था।

अपने एक वीडियो में उमर गौतम कलीम सिद्दीकी का नाम भी लेता है जो जकात फाउण्डेशन का चेयरमैन है। कलीम सिद्दीकी उत्तर प्रदेश का ही है और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का मेम्बर भी है। कलीम सिद्दीकी को कन्वर्जन माफिया भी कहा जाता है। इसके लिए उसे सऊदी अरब से पैसा भी मिलता है। सोशल मीडिया पर मौजूद उसके कुछ विडियो में वह सऊदी जाकर स्वयं स्वीकार करता है वह भारत में लोगों को इस्लाम कबूल करवाने के काम में लगा हुआ है। उसका कहना है कि उसने अब यूपी से लेकर उत्तराखंड तक कई हिन्दुओं को इस्लाम कबूल करवाकर उन्हें जहन्नुम की आग में जाने से बचाया है। अब वो लोग आगे लोगों को इस्लाम कबूल करवा रहे हैं। यूपी एटीएस ने अब उसकी गतिविधियों को भी अपनी जांच में शामिल कर लिया है।

इस जांच का दायरा जैसे जैसे बढेगा वैसे वैसे पूरा गिरोह पकड़ में आयेगा लेकिन आश्चर्य की बात तो ये है कि बीते चार सालों से मुसलमानों द्वारा जो प्रचारित किया जा रहा था कि मोदी योगी के शासन में उनका दमन किया जा रहा है तो क्या दमन के बाद इस तरह से खुलेआम धर्मांतरण का खेल चलाया जा सकता है? निश्चित ही मुस्लिम समर्थकों द्वारा जानबूझकर ऐसा माहौल बनाया गया ताकि चरमपंथी मुसलमान बेरोक टोक अपना काम करते रहें।

जिस तरह से आज ये कन्वर्जन गिरोह पकड़ में आ रहा है उससे यही लगता है कि मुसलमानों में कुछ समूह ऐसे सक्रिय हैं जो अपनी जनसंख्या बढाने में लगे हुए हैं। फिर चाहे वह लव जिहाद हो, धर्मांतरण हो, रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुसलमानों को भारत में बसाने में मदद हो या फिर अधिक से अधिक बच्चे पैदा करनेवाली मानसिकता। मुसलमानों में कुछ समूह ऐसे हैं जो इन्हीं रास्तों से अपनी जनसंख्या बढाने का प्रयास कर रहे हैं। वो ऐसा क्यों कर रहे हैं ये तो वही जाने लेकिन इसमें काफी हद तक सफल जरूर है।

भारत के बंटवारे के बाद 1951 में भारत में 84 प्रतिशत हिन्दू और 10 प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या थी। साठ साल बाद 2011 की जनगणना में हिन्दू 4 प्रतिशत घटकर 80 प्रतिशत हो गये और मुस्लिम 4 प्रतिशत बढकर 14 प्रतिशत। ये आंकड़े बता रहे हैं मुस्लिम जनसंख्या इस देश में लगातार बढ रही है। कलीम सिद्दीकी या उमर गौतम जैसे लोग पीढी दर पीढी जो कार्य कर रहे हैं, उसका परिणाम सामने है।