विश्व धर्म संवाद: ‘धर्म’ नहीं ‘अधर्म’ से लड़ने की जरूरत


स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन (12 जनवरी) के अवसर पर ‘सोशल रिफॉर्म्स एंड रिसर्च आर्गेनाइजेशन’ ने ‘विश्व धर्म संवाद’ का आयोजन किया। विश्व धर्म संवाद में हिंदू, सिख, जैन, मुस्लिम, यहूदी और बहाई संप्रदाय के धर्मगुरुओं ने हिस्सा लिया।


प्रदीप सिंह प्रदीप सिंह
देश Updated On :

नई दिल्ली। जब भी देश-विदेश में धर्मों के बीच संकीर्णता, समाज में सांप्रदायिकता, ऊंच-नीच और नस्लीय भेदभाव की बात सामने आती है तब इसके समाधान के लिए सबकी जुबान पर स्वामी विवेकानंद का नाम आता है। ऐसा इसलिए क्योंकि 1893 में अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद ने सभी धर्मों को बराबर बताते हुए धार्मिक संकीर्णता को छोड़ते हुए आपसी संवाद पर जोर दिया था।

12 जनवरी स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस को भारत सरकार ‘युवा दिवस’ के रूप मनाती है। इस दौरान देश-विदेश में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस वर्ष दिल्ली में स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन के अवसर पर ‘सोशल रिफॉर्म्स एंड रिसर्च आर्गेनाइजेशन’ ने ‘विश्व धर्म संवाद’ का आयोजन किया। विश्व धर्म संवाद में हिंदू, सिख, जैन, मुस्लिम, यहूदी और बहाई धर्म के धर्मगुरुओं ने हिस्सा लिया।

शिकागो में 128 वर्ष पहले स्वामी विवेकानंद द्वारा दिय़े गये प्रसिद्ध भाषण को रेखांकित करते हुए अधिकांश वक्ताओं ने अपनी बात रखी।

सर्वप्रथम जैन धर्म के गणवीर राजेंद्र विजय जी महाराज ने “प्रथम विश्व धर्म संवाद” को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि “धर्म दो अलग-अलग समुदाय के संस्कारों को एक साथ लाता है। आज समस्या यह है कि भगवान को सब मानते हैं, लेकिन भगवान की कही बातों को कोई नहीं मानता। वेद, कुरान, बाइबिल, तोरा को सब मानते हैं लेकिन उसकी सीख का पालन कोई नहीं करता।”

इस्लाम धर्म के डॉ. उमेर अहमद इलियासी ने कहा कि “धर्म अलग हो सकते हैं, जाति अलग हो सकती है पर इंसानियत का धर्म सबसे बड़ा है वो कभी अलग नहीं हो सकता है। आज हम सबको एक शपथ लेनी चाहिए कि सड़क पर जब कभी कोई एंबुलेंस दिखे तो उसके लिये सबसे पहले रास्ता छोड़कर उसमें जा रहे व्यक्ति के लिये हाथ ऊपर उठा कर भगवान-अल्लाह या वाहे गुरु से दुआ करें। क्योंकि कल हो सकता है कि हम या हमारा कोई नजदीकी अस्पताल जा रहा हो। निस्वार्थ दुआ बहुत असर करती है।”

स्वामी संपूर्णानंद सरस्वती ने कहा कि, “धर्म कभी मिट नहीं सकता है। अधर्म खत्म होता है। यदि किसी का धर्म मिटा तो उसका अस्तित्व समाप्त हो जायेगा। दूसरे के सुख को सुख औऱ दूसरे के दुख को दुख समझेंगे तभी मानवता का कल्याण होगा और शैतान या अधर्म अपने आप हार जायेगा।”

सिख धर्म के परमजीत सिंह चंडोक ने कहा कि, “भारत में गुलदस्ते के फूलों की तरह अलग-अलग धर्मों के लोग एक साथ रहते हैं। हमें सभी धर्मों का आदर करना चाहिये। इंसान की समस्या का हल संवाद से होगा हथियार से नहीं।”

बहाई धर्म के डॉ. एके मर्चेंट ने कोरोना काल में विश्व धर्म संवाद के आयोजन की बधाई देते हुये कहा कि गरीबों की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने शिक्षा में सुधार पर बल दिया।

भारत में यहूदी धर्म के प्रमुख रब्बी ईजेकील इसहाक मालेकर ने स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए कहा कि मंदिर में फूल चढ़ाने से पहले मन को महकाना जरूरी है। मंदिर में दीप जलाने के पहले घर में दीप जलाना सुनिश्चित होना चाहिए। किसी का दिल दुखाना सबसे बड़ा अधर्म है। हमें अपनी पहचान धर्म नहीं भारतीयता की सर्वोपरि रखनी होगी। इसके साथ ही हमें पर्यावरण की सुरक्षा का भी ध्यान रखना होगा।

प्रदीप भैया जी महाराज ने कहा कि धर्म ही सत्य है और सब अपने-अपने हिस्से की लड़ाई लड़ रहे हैं। हमने विश्व को बुद्ध दिया और विश्व ने युद्ध दिया। कार्यक्रम के संयोजक प्रमोद कुमार ने उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुये कहा कि हम अगले वर्ष यानी 12 जनवरी 2022 को विशाल विश्व धर्म संवाद आयोजित करेंगे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार कात्यायनी चतुर्वेदी ने किया।