असोला भट्टी अभयारण्य में होगी वन्यजीव गणना, तेंदुओं पर दिया जाएगा विशेष ध्यान


दिल्ली वन विभाग इस साल राष्ट्रीय राजधानी के असोला भट्टी वन्यजीव अभयारण्य में पहली बार वन्यजीव गणना की जाएगी और तेंदुओं की संख्या पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।


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नई दिल्ली। दिल्ली वन विभाग इस साल राष्ट्रीय राजधानी के असोला भट्टी वन्यजीव अभयारण्य में पहली बार वन्यजीव गणना की जाएगी और तेंदुओं की संख्या पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।

उन्होंने बताया कि यह गणना जुलाई में शुरू होनी है और इसे पूरा करने में कम से कम तीन महीने लगेंगे। वन उपसंरक्षक (दक्षिण संभाग) अमित आनंद ने पीटीआई-भाषा को बताया, “यह इस वर्ष की विभाग की प्राथमिकताओं में से एक है। हम इसे नियमित अभ्यास बनाने की कोशिश करेंगे। वार्षिक गणनाएं क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों को निर्धारित करने में मदद करेंगी।”

यह वन्यजीव अभयारण्य दिल्ली-हरियाणा सीमा पर अरावली पर्वतीय क्षेत्र के दक्षिणी दिल्ली रिज पर 32.71 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह दक्षिणी दिल्ली और हरियाणा के फरीदाबाद और गुरुग्राम जिलों के उत्तरी हिस्से में पड़ता है तथा अरावली तेंदुआ वन्यजीव गलियारे का हिस्सा है जो राजस्थान के सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान से दिल्ली रिज तक फैला हुआ है।

आनंद ने बताया कि इसका लक्ष्य अभयारण्य में वर्तमान में प्रजातियों की संख्या का पता लगाना, वे कैसे-कैसे फैली हुई हैं और उन्हें किसी खास इलाके में क्या परेशानी आती है, यह पता लगाना है।

उन्होंने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए, कभी-कभी सियार कुछ खास जगहों पर ही नजर आते हैं। यह किसी शारीरिक बाधा या गड़बड़ी की वजह से हो सकता है। गणना के आंकड़ों की मदद से ऐसी समस्याओं को सुलझाने के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाएं जाएंगे और वन्यजीवों के प्राकृतिक वास की व्यवस्था को सुधारा जाएगा।” अधिकारी ने बताया कि गणना का मुख्य केंद्र तेंदुएं होंगे किंतु अन्य प्रजातियां एवं पक्षी भी उतने ही महत्त्वपूर्ण हैं।



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