आज स्वामी अग्निवेश की पुण्यतिथि है


स्वामी अग्निवेश मूलतः आंध्र प्रदेश के रहने वाले थे लेकिन उनका बचपन छत्तीसगढ़ में बीता।


भास्कर ऑनलाइन भास्कर ऑनलाइन
देश Updated On :

स्वामी अग्निवेश मूलतः आंध्र प्रदेश के रहने वाले थे लेकिन उनका बचपन छत्तीसगढ़ में बीता। छत्तीसगढ़ से उनका लगाव जीवन भर बना रहा। मैं और मेरी पत्नी छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के साथ रहते थे और वहां के मुद्दे उठाते थे।

स्वामी अग्निवेश का सहयोग हमें हमेशा मिलता रहा। स्वामी जी बहुत साहसी थे वह बिल्कुल डरते नहीं थे। छत्तीसगढ़ में सलवा जुडूम के दौरान और उसके बाद बड़े-बड़े आदिवासी संहार सरकार के द्वारा किये गए

स्वामी अग्निवेश उनके खिलाफ आवाज उठाने में हमेशा आगे आ जाते थे। एक बार माओवादियों ने पांच सिपाहियों का अपहरण कर लिया था स्वामी अग्निवेश उन्हें छुड़ाने के लिए अबूझमाड़ गए और सफलतापूर्वक सिपाहियों को छुड़ाकर लाए।

छत्तीसगढ़ के ताड़मेटला में जब आदिवासियों के 300 घरों को पुलिस ने जलाया था तो मेरे सूचना देने पर स्वामी अग्निवेश तुरंत छत्तीसगढ़ गए। जहां पुलिस अधिकारी कल्लूरी के नेतृत्व में स्वामी अग्निवेश पर भयानक हमला हुआ, जिसमें स्वामी अग्निवेश की जान बाल बाल बची थी।

जब सारकेगुडा गांव में सीआरपीएफ ने सत्रह आदिवासियों को मार डाला जिनमें नौ बच्चे भी थे। इस घटना पर हमने दिल्ली में इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन किया और सभा की। स्वामी अग्निवेश ने आगे बढ़ कर इस मुद्दे पर आदिवासियों के पक्ष में बात रखी।

स्वामी जी का टीवी शो राज्यसभा चैनल पर आता था। उस दौरान पी चिदम्बरम गृह मंत्री थे। स्वामी जी ने मुझे उस कार्यक्रम में बोलने के लिए बुलाया। मैंने स्वामी जी को चेतावनी दी कि यदि आपने मुझे कार्यक्रम में बुलाया तो अगले हफ्ते से आप का कार्यक्रम सरकार बंद कर देगी।

स्वामी जी ने कहा कोई बात नहीं आप आइए। मेरी बातों का जवाब देने के लिए गृह मंत्रालय से एक संयुक्त सचिव भी आए थे, लेकिन सच्चाई का मुकाबला कौन कर सकता है

मेरी बातों में जमीनी सच्चाई थी सरकार के प्रतिनिधि जवाब नहीं दे पाए। 2 दिन बाद स्वामी जी को पत्र आ गया कि अगले हफ्ते से आप का कार्यक्रम प्रसारित नहीं किया जाएगा। स्वामी जी का मुझ पर विशेष स्नेह रहता था। स्वामी जी मुझसे कहते थे कि आपके घर पर महर्षि दयानंद आकर रहते थे आपका पूरा परिवार आर्य समाज से जुड़ा था आप भी आर्य समाज संगठन से जुड़िए।

मैं स्वामी जी से कहता था की अब मेरे लिए एक ऐसे संगठन से जुड़ना जिसमें ज्यादातर लोग आरएसएस के समर्थक हों संभव नहीं है। इसके अलावा अब ईश्वर और हवन जैसी चीज भी मैं स्वीकार नहीं कर सकता मैं अब इन चीजों से आगे बढ़ चुका हूं।

इसके बावजूद स्वामी जी मुझ पर पहले जैसा ही स्नेह करते रहे। मैं कुछ समय उनके वहलपा आश्रम में भी रहा। स्वामी जी का मुझे आदेश था कि मैं जब भी दिल्ली आऊं के साथ उनके घर पर ठहरूं। दिल्ली में जब अमित शाह ने मुसलमानों पर हमले करवाए और उसे दंगे का नाम दिया।

उसके बाद मैं राहत कार्य के लिए दिल्ली गया तब स्वामी जी ने मुझे अपने जंतर मंतर वाले कार्यालय में बने अतिथि गृह में ठहराया जहां हम मीटिंगें और राहत सामग्री जमा करना और बांटने का काम करते थे।

स्वामी अग्निवेश के ना रहने पर ऐसा महसूस हो रहा है जैसे हमारा एक बहुत सशक्त सहयोगी साथ छोड़ गया हो। आज जब भाजपा सरकार सामाजिक कार्यकर्ताओं को डरा रही है उन्हें जेलों में डाल रही है। स्वामी अग्निवेश जैसी निडरता की हम सब को  बहुत जरूरत है।

हिमांशु कुमार के फेसबुक से सभार



Related