देश-विदेश में इस्कॉन ट्रेडमार्क की काफी प्रतिष्ठा है : उच्च न्यायालय


प्रतिवादी इस्कॉन अपैरल प्राइवेट लिमिटेड ने अदालत को शुक्रवार को बताया कि उसने अब अपना नाम बदलकर एलकिस स्पोर्टस प्राइवेट लिमिटेड कर लिया है और एक हलफनामा दाखिल कर रहा है कि भविष्य में वह इस्कॉन के नाम या ट्रेडमार्क का इस्तेमाल नहीं करेगा।


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मुंबई। बंबई उच्च न्यायालय ने कहा है कि ‘इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्ण कॉन्शसनेस’ के पंजीकृत ट्रेडमार्क ‘इस्कॉन’ ने भारत और विदेशों में भी काफी प्रतिष्ठा अर्जित की है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह धार्मिक गतिविधियों से जुड़ा है किसी अन्य चीज से नहीं।

न्यायमूर्ति बी पी कोलाबावाला ने इस्कॉन अपैरल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्ण कॉन्शसनेस (इस्कॉन) द्वारा दायर वाणिज्यिक बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपी) से जुड़े मामले पर शुक्रवार को सुनवाई की । न्यायमूर्ति ने कहा कि निस्संदेह ट्रेडमार्क को सुरक्षित रखने का अधिकार है ।

इस्कॉन ने आरोप लगाया था कि परिधान कंपनी ने ऑनलाइन कपड़ा बेचकर उसके पंजीकृत ट्रेडमार्क का उल्लंघन किया ।

प्रतिवादी इस्कॉन अपैरल प्राइवेट लिमिटेड ने अदालत को शुक्रवार को बताया कि उसने अब अपना नाम बदलकर एलकिस स्पोर्टस प्राइवेट लिमिटेड कर लिया है और एक हलफनामा दाखिल कर रहा है कि भविष्य में वह इस्कॉन के नाम या ट्रेडमार्क का इस्तेमाल नहीं करेगा।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ट्रेड मार्क कानून, 1999 के तहत इस्कॉन भारत में एक जाना-माना ट्रेडमार्क है।

यह स्पष्ट है कि इस्कॉन के ट्रेडमार्क का अधिकार वादी के पास है और पहले इसका इस्तेमाल कहीं नहीं हुआ है। न्यायमूर्ति ने कहा कि चूंकि इसका अधिकार वादी के पास है इसलिए निस्संदेह इसके संरक्षण का अधिकार उसके पास है।

अदालत ने कहा कि वादी के ट्रेडमार्क इस्कॉन ने देश और विदेश में काफी प्रतिष्ठा अर्जित की है इसलिए इसमें कोई संदेह नहीं है इस पर उसका अधिकार है किसी और का नहीं ।

याचिका के मुताबिक, इस्कॉन की शुरुआत 1966 में अमेरिका में हुई और कुछ ही समय में दुनिया में इसका विस्तार हुआ और इसे लोकप्रियता मिलती गयी । भारत में 1971 में इस्कॉन के पहले मंदिर का निर्माण हुआ ।

याचिका में कहा गया कि वर्तमान में भारत सहित दुनिया भर में इस्कॉन के 600 से ज्यादा मंदिर हैं ।



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