सरकारी नौकरियों के सृजन पर रोक संबंधी आदेश वापस ले सरकार: कांग्रेस


‘‘निजी क्षेत्र में तो छंटनी चल रही है, लेकिन सरकार ने अब अपनी नौकरियों पर भी रोक लगा दी है। इस तरह से इस देश के युवा कहां जाएंगे? कहां नौकरियां मिलेंगी उन्हें? क्या करेंगे वो?’’ शुक्ला के मुताबिक, सरकार ने सीएमआईई का डाटा जारी किया और उसमें उसने ख़ुद स्वीकार किया कि किस तरह से 15 से 29 साल के आयु वर्ग में 17.8 प्रतिशत नौकरियां चली गयीं और इसके अलावा 20 अगस्त तक 1.89 करोड़ लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी।


भाषा भाषा
देश Updated On :

नई दिल्ली। कांग्रेस ने गैर जरूरी खर्चों में कटौती से जुड़े सरकार के प्रस्ताव को लेकर शनिवार को कहा कि नयी नौकरियों के सृजन पर रोक ‘जन विरोधी कदम’ है और इस आदेश को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।

पार्टी के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला ने वीडियो कॉन्ंफ्रेंस के माध्यम से संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस समय देश की आर्थिक स्थिति बहुत ही बुरी हालत में है। 45 साल में पहली बार जीडीपी में इतनी गिरावट हो रही है। इस घनघोर आर्थिक संकट से उबरने के लिए सरकार को एक कदम आगे बढ़कर आना चाहिए, जैसे दुनिया के बाकी देश कर रहे हैं।’’

उन्होंने सवाल किया, ‘‘निजी क्षेत्र में तो छंटनी चल रही है, लेकिन सरकार ने अब अपनी नौकरियों पर भी रोक लगा दी है। इस तरह से इस देश के युवा कहां जाएंगे? कहां नौकरियां मिलेंगी उन्हें? क्या करेंगे वो?’’ शुक्ला के मुताबिक, सरकार ने सीएमआईई का डाटा जारी किया और उसमें उसने ख़ुद स्वीकार किया कि किस तरह से 15 से 29 साल के आयु वर्ग में 17.8 प्रतिशत नौकरियां चली गयीं और इसके अलावा 20 अगस्त तक 1.89 करोड़ लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी।

उन्होंने दावा किया, ‘‘2014 के चुनाव में हर साल 2 करोड़ नौकरी का वादा किया गया था, जबकि हर साल अब 2 करोड़ नौकरियां खत्म हो रही हैं।

शुक्ला ने कहा, ‘‘कांग्रेस पार्टी ये मांग करती है कि सरकारी नौकरियों को ठप करने का जो सरकार का आदेश है, उसे तत्काल वापस लिया जाए और ज्यादा से ज्यादा नौकरियों सृजित करने पर जोर दिया जाए।’’

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को फिलहाल हजारों-लाखों करोड़ रुपये वाली अपनी बड़ी परियोजनाओं पर रोक लगाकर युवाओं को रोजगार देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

गौरतलब है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटे में भारी वृद्धि की आशंका के बीच सरकार ने शुक्रवार को सभी मंत्रालयों/विभागों से गैर- जरूरी खर्चों को कम करने को कहा है। सरकार ने मंत्रालयों/विभागों से परामर्शकों की नियुक्ति की समीक्षा करने, आयोजनों में कटौती करने और छपाई के लिए आयातित कागत का इस्तेमाल बंद करने की सलाह दी है।

व्यय विभाग की ओर से जारी एक कार्यालय ज्ञापन में कहा गया है, ‘‘मौजूदा राजकोषीय स्थिति तथा सरकार के संसाधनों पर दबाव को देखते हुए गैर-प्राथमिकता वाले खर्चों को कम करने और तर्कसंगत बनाने की जरूरत है, ताकि प्राथमिकता वाले खर्च के लिए संसाधन सुनिश्चित किए जा सकें।’’

नए पदों के सृजन के बारे में कहा गया है कि इनपर प्रतिबंध रहेगा। कुछेक मामलों में व्यय विभाग की अनुमति से नए पदों का सृजन किया जा सकता है।