न्यायालय ने छेड़छाड़ के मामले में पीड़िता से राखी बंधवाने की शर्त पर जमानत देने संबंधी मामले में अटॉर्नी जनरल से मांगा सहयोग


न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल के कार्यालय को नौ महिला अधिवक्ताओं की ओर से दाखिल की गई याचिका पर नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि देश भर की अदालतों पर इस प्रकार की शर्तें लगाने पर रोक लगाई जानी चाहिए क्योंकि यह ‘‘कानून के सिद्धांतों के खिलाफ’’ हैं।


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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने अटॉर्नी जनरल से शुक्रवार को उस याचिका पर सहयोग मांगा जिसमें छेड़छाड़ के एक मामले में आरोपी को शिकायकर्ता से राखी बंधवाने की शर्त पर जमानत दिये जाने के मप्र उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।

न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल के कार्यालय को नौ महिला अधिवक्ताओं की ओर से दाखिल की गई याचिका पर नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि देश भर की अदालतों पर इस प्रकार की शर्तें लगाने पर रोक लगाई जानी चाहिए क्योंकि यह ‘‘कानून के सिद्धांतों के खिलाफ’’ हैं।

उच्च न्यायालय ने 30 जुलाई के अपने एक आदेश में आरोपी को जमानत देते हुए यह शर्त रखी थी कि वह अपनी पत्नी के साथ शिकायतकर्ता के घर जाएगा और शिकायतकर्ता से उसे ‘राखी’ बांधने का अनुरोध करेगा साथ ही अपनी क्षमता के मुताबिक उसकी रक्षा करने का वादा करेगा।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने पीठ को बताया कि याचिका ‘‘अभूतपूर्व परिस्थितियों’’ में दाखिल की गई हैं।

पारिख ने पीठ से कहा,‘‘ इस प्रकार की शर्तों से पीड़ित की परेशानी महत्वहीन बन जाती है।’’ पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए दो नवंबर की तारीख नियत की है।



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