न्यायालय ने अवमानना मामले में दिए गए आदेश पर पुनर्विचार की माल्या की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा


भगौड़े कारोबारी माल्या ने शीर्ष न्यायालय के नौ मई 2017 के उस आदेश पर पुनर्विचार के लिये याचिका दायर की थी, जिसमें उसे न्यायिक आदेशों को दरकिनार कर अपने बच्चों के खातों में चार करोड़ अमेरिकी डॉलर स्थानांतरित करने पर अदालत की अवमानना का दोषी करार दिया गया था।


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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने उद्योगपति विजय माल्या की उस याचिका पर बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया जिसमें अदालत की अवमानना मामले में 2017 में सुनाए गए आदेश पर पुनर्विचार का अनुरोध किया गया था।

दरअसल भगौड़े कारोबारी माल्या ने शीर्ष न्यायालय के नौ मई 2017 के उस आदेश पर पुनर्विचार के लिये याचिका दायर की थी, जिसमें उसे न्यायिक आदेशों को दरकिनार कर अपने बच्चों के खातों में चार करोड़ अमेरिकी डॉलर स्थानांतरित करने पर अदालत की अवमानना का दोषी करार दिया गया था।

न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने मामले में दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।

न्यायालय ने जून में अपनी रजिस्ट्री को यह बताने के लिये कहा था कि बीते तीन साल में माल्या की पुनर्विचार याचिका को संबंधित अदालत के समक्ष सूचीबद्ध क्यों नहीं किया गया। उसने रजिस्ट्री को बीते तीन साल में याचिका से संबंधित फाइल को देखने वाले अधिकारियों के नामों समेत सभी जानकारी मुहैया कराने के लिये कहा था।

नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक के बैंक कर्ज धोखाधड़ी मामले में आरोपी माल्या फिलहाल ब्रिटेन में है।

शीर्ष अदालत ने 2017 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह की याचिका पर वह आदेश दिया था। याचिका में कहा गया था कि माल्या ने कथित रूप से विभिन्न न्यायिक आदेशों का ‘खुलेआम उल्लंघन’ कर ब्रिटिश कंपनी डियाजियो से प्राप्त चार करोड़ अमेरिकी डॉलर अपने बच्चों के खातों में स्थानांतरित किये थे।