बिहार विधानसभा चुनाव : दोनों गठबंधनों में जबरदस्त रस्साकस्सी

अमरनाथ झा
बिहार चुनाव 2020 Updated On :

पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी का एनडीए में शामिल होने से विधानसभा चुनाव के पहले बिहार का राजनीतिक विन्यास बदलने की संभावना है। महागठबंधन के दूसरे साझीदार भी राजद का वामदलों से बढ़ती नजदीकी को लेकर आशंकित हो गए हैं, दूसरी तरफ एनडीए के पुराने साझीदार लोजपा से जदयू की खटास बढ़ती जा रही है और वह जदयू के खिलाफ अपना उम्मीदवार देने का मन बना रही है। इसतरह दोनों गठबंधनों में जबरदस्त रस्साकस्सी चल रही है।

पाला-बदल के लिए चर्चित नेता जीतन राम मांझी ने पखवाडे भर पहले राजद के नेतृत्व वाली महागठबंधन छोड़ी थी। उनका पिछले कुछ समय से राजद के साथ अनबन चल रहा था। मांझी लगातार मांग करते रहे हैं कि महागठबंधन की घटक पार्टियों की संचालन समिति बने। इस मांग को लेकर उन्होंने दूसरे घटक दलों के साथ भी बैठकें भी की। पर बात बनी नहीं।

उल्लेखनीय है कि 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ गठबंधन तोड़कर राजद के साथ गठबंधन किया था। लेकिन चुनावों में राजद-जदयू को अपेक्षित परिणाम नहीं मिला जिसकी जिम्मेवारी लेते हुए नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बना दिया था। परन्तु थोड़े ही दिनों में मांझी के साथ उनकी अनबन हो गई और वे जीतन राम को हटाकर फिर मुख्यमंत्री बन गए। जीतनराम मांझी ने जदयू छोड़कर अपनी पार्टी बना ली। फिर विधानसभा चुनाव में जदयू और राजद एक साथ उतरी, जबकि भाजपा-लोजपा एवं जीतन राम हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा एक साथ रही। इन चुनावों में जीतनराम केवल अपनी सीट बचा पाए, उनकी पार्टी को दूसरी किसी सीट से जीत नहीं मिली। इसबार राजद के सहयोग से नीतीश कुमार की सरकार बनी। पर कुछ ही महीनों में नीतीश कुमार ने राजद से पल्ला झाड़ लिया और भाजपा के साथ गठबंधन कर लिया। फिरभी एनडीए में बने रहे, लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव के पहले एनडीए छोड़कर महागठबंधन में शामिल हुए और गठबंधन की ओर से लोकसभा चुनाव में उतरे। पर वे गया सीट से जीत नहीं सके।

पर गठबंधन में संचालन समिति के सवाल पर मतभेद उभरने लगे। इसबीच वे अचानक मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार की तारीफ भी करने लगे। जिससे यह कयास लगाया जाने लगा था कि उनका जदयू के साथ भीतर-भीतर संपर्क बन रहा है। पर संकट यह था कि एनडीए में किसी को शामिल करने में भाजपा की सहमति आवश्यक होती। पर बाद में जदयू से गठबंधन करने की तजबीज सामने आई। इसबीच 20 अगस्त को उन्होंने महागठबंधन छोड़ने की घोषणा कर दी। लेकिन अपने अगले कदम के बारे में कुछ स्पष्ट नहीं किया। उधर एनडीए की दूसरी घटक लोजपा के नीतीश सरकार पर लगातार हमलावर होने से जदयू ने दूसरे दलित नेता को अपने साथ लाने का रास्ता अपना लिया। जदयू ने जीतन राम मांझी से गठबंधन कर लिया। लेकिन इस बारे में भाजपा का रुख अभी स्पष्ट नहीं है।

उल्लेखनीय है कि मांझी का मध्य बिहार के गया क्षेत्र में अच्छा प्रभाव है। वे दलित समुदाय की मुशहर जाति से आते हैं जिसकी संख्या बिहार की जनसंख्या की करीब 2.5 प्रतिशत है और इस जाति के लोग मध्य बिहार के अलावा उत्तर बिहार में नेपाल की सीमा के सटे इलाके में रहते हैं। वे लोग पिछले कुछ वर्षों से भाजपा को वोट करते रहे हैं। जीतन राम के एनडीए में आने से इस जाति का समर्थन अधिक पुख्ता हो सकेगा।