अपनी रैलियों में प्रधानमंत्री मोदी ने हिन्दुत्व के मुद्दे को उछाल ही दिया…


दूसरे चरण के मतदान के लिए दूसरे दौर के चुनाव-प्रचार में प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या, राम मंदिर, धारा-370 के निरस्तीकरण, पाकिस्तान और चीन, नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएए) का उल्लेख करने के बाद बिहार में जंगल राज की वापसी के खतरों के प्रति लोगों को अगाह किया।


अमरनाथ झा
बिहार चुनाव 2020 Updated On :

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के दिन अपनी रैलियों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हिन्दुत्व के मुद्दे को उछाल ही दिया। लगे हाथ पाकिस्तान, पुलवामा और गलवान घाटी की याद भी उन्हें आ गई। फिर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को जंगलराज का युवराज ठहराते हुए उनके बहकावे में नहीं आने की अपील कर डाली।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बिहार को विकसित राज बनाने की उम्मीद जताई। दोनों में से किसी को पिछले पंद्रह साल से चल रही नीतीश सरकार का कोई ऐसा काम याद नहीं आया जिसका जिक्र चुनाव सभा में किया जा सके।

दूसरे चरण के मतदान के लिए दूसरे दौर के चुनाव-प्रचार में प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या, राम मंदिर, धारा-370 के निरस्तीकरण, पाकिस्तान और चीन, नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएए) का उल्लेख करने के बाद बिहार में जंगल राज की वापसी के खतरों के प्रति लोगों को अगाह किया।

उन्होंने को दरभंगा, मुजफ्फरपुर और पटना में सभाएं की। पिछले सप्ताह अपने प्रचार अभियान की शुरुआत करते हुए सासाराम में मोदी ने नया बिहार बनाने के लिए वोट मांगे और 90 के दशक के जंगल राज का डर दिखाया। उस दौर में उन्होंने तीन सभाओं को संबोधित किया था।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दरभंगा की सभा में अपने भाषण को प्रधानमंत्री मोदी के कामकाज का गुणगान करने में समर्पित कर दिया और उम्मीद जताई कि अगर बिहार में एनडीए सत्ता में वापस आती है तो प्रधानमंत्री के सहयोग से बिहार को विकसित राज्य बनाया जाएगा। उनके भाषण से लगता है कि मुख्यमंत्री को अपनी सरकार के किए विकास कार्यों का उल्लेख करने से जन-समर्थन मिलने में संदेह हो गया है।

उन्होंने केन्द्रीय सहायता से चलने वाली योजनाओं पटना मेट्रो, स्मार्ट सीटी, उज्जवला योजना आदि का उल्लेख किया। भीड़ से मोदी-मोदी का शोर होने पर नीतीश कुमार ने कहा कि सचमच लोग प्रधानमंत्री मोदी को सुनने आए हैं। नीतीश के बाद प्रधानमंत्री को बोलने के लिए युगपुरुष कहकर बुलाया गया।

लोकसभा चुनाव 2019 में एनडीए की जबरदस्त जीत को मोदी लहर के कारण माना जाता है, पर यह पहला विधानसभा चुनाव है जिसमें भाजपा और मोदी को आगे रखा गया है। इसके पहले 2009 लोकसभा चुनाव और 2010 विधानसभा चुनावों के समय वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और उन्हें नीतीश कुमार के दबाव में बिहार चुनाव में प्रचार से अलग रखा गया था।

नीतीश 2002 के गुजरात दंगों की वजह से मोदी से बिदक रहे थे और 2015 चुनाव में भाजपा का साथ छोड़कर महागठबंधन के साथ चले गए थे।

चुनाव-सभाओं में नीतीश सरकार के कामकाज के बजाए मोदी सरकार के कामकाज और कथित उपलब्धियों का उल्लेख और आखिरकार हिन्दुत्व के मुद्दे का उल्लेख होने से इतना तो एकदम स्पष्ट है कि जदयू रक्षात्मक स्थिति में आ गई है और भाजपा को अपने आधार-वोटरों के खिसकने की भी आशंका होने लगी है।